चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 3 घंटे लंबे भाषण के क्या हैं मायने?

इमेज स्रोत, Reuters
ऐसे वक्त में जब अमरीका एशिया में चीन के 'नकारात्मक असर' को देखते हुए भारत को अहम सहयोगी के रूप में देख रहा है. चीन ख़ुद को दुनिया के मंच पर केंद्रीय भूमिका में देख रहा है.
कम्युनिस्ट पार्टी के सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भाषण पर चीन समेत दुनिया के कई मुल्कों की निगाहें थीं.
तीन घंटे लंबे दिए भाषण में शी जिनपिंग ने अपनी उपलब्धियां गिनवाईं और भविष्य के लिए अपना रोडमैप बताया. शी जिनपिंग ने कहा, ''चीन एक नए युग में प्रवेश कर चुका है, जहां हमें दुनिया के केंद्रीय मंच पर अपनी जगह लेनी चाहिए.
- चीनी विशेषताओं के साथ समाजवाद के तहत मुल्क ने तेजी से विकास किया. ये दिखाता है कि दूसरे मुल्कों के पास एक नया विकल्प है.''

इमेज स्रोत, Getty Images
जिनपिंग को मिलेगा मौका?
इस सम्मेलन का मकसद चीन के अगले प्रमुख को चुनना और नीतियों का ऐलान करना है. सम्मेलन में शी जिनपिंग के पार्टी प्रमुख बन रहने की संभावना जताई जा रही है.
हर पांच साल में आयोजित होने वाली कांग्रेस मंगलवार तक चलेगी. कड़ी सुरक्षा के बीच इस सम्मेलन में दो हज़ार से ज़्यादा प्रतिनिधि शामिल होंगे.
कांग्रेस के ख़त्म होने पर पार्टी में नए सदस्य शामिल हो सकते हैं. ये सदस्य चीन के सर्वोच्च निर्णय लेने वाली द पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी में शामिल होंगे. ये कमेटी देश को चलाती है.

इमेज स्रोत, Getty Images
शी जिनपिंग ने भाषण में और क्या कहा-
- इस नए युग में चीनी विशेषताओं के साथ समाजवाद के मायने ये हुए कि आज चीन दुनिया में महान शक्ति बन गया है.
- मानव जाति के इतिहास में चीन ने अहम भूमिका निभाई है.
- कम्युनिस्ट शासन में चीन का विकास मॉडल समृद्धिशील रहा. हम विकासशील देशों के लिए नए विकल्प के तौर पर उभरे हैं.
- अब वक्त आ गया है कि हम दुनिया के केंद्रीय मंच पर अपनी जगह लें और मानवजाति को अपना महान योगदान दें.

इमेज स्रोत, Getty Images
2012 से सत्ता में हैं जिनपिंग
चीनी राष्ट्रपति साल 2012 में जब सत्ता में आए थे, चीन की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही थी.
लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि चीन पहले के मुक़ाबले ज़्यादा सत्तावादी बनी है. क्योंकि इस दौरान वकीलों और कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी और सेंसरशिप बढ़ी है.

इमेज स्रोत, Getty Images
बीबीसी चीनी सेवा की संपादक कैरी ग्रेसी का विश्लेषण
शी जिनपिंग पहले के राष्ट्र प्रमुखों से ज़्यादा मुखर नेता रहे हैं. सम्मेलन के दौरान अपनी लंबे भाषण में वो काफी आत्मविश्वास से भरे नज़र आए.
जिनपिंग ने अपने पांच सालों की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि पार्टी ने असंभव लक्ष्य पूरे किए, विश्व में चीन की भूमिका बढ़ी है.
लेकिन इसमें जो बात सबसे ज़्यादा ध्यान खींचने वाली है, वो है वैचारिक विश्वास.
हाल ही में पार्टी की मीडिया ने पश्चिमी लोकतंत्र में फैले संकट की तुलना चीन की मजबूती और एकता से की थी. शी जिनपिंग अपने भाषण में कहते हैं कि वो विदेश राजनीतिक प्रणाली की नकल नहीं करेंगे.
जिनपिंग ने कहा, ''कम्युनिस्ट पार्टी हर उस बात का विरोध करेगी, जो चीन के नेतृत्व को नकारेगी.''

इमेज स्रोत, Getty Images
शी जिनपिंग के भाषण की खास बातें
जिनपिंग ने अपने भाषण में चीन के समाजवादी आधुनिकीकरण की योजना को 2050 तक लाने के लिए दो चरण की योजना का ब्यौरा दिया. इस योजना में पर्यावरण और अर्थव्यवस्था से जुड़े सुधार शामिल हैं, जिसके ज़रिए चीन को ''समृद्ध और खूबसूरत'' बनाने की बात कही गई.
शिंजियांग, तिब्बत और हॉन्गकॉन्ग में बीते दिनों में अलगाववाद को लेकर हुए आंदोलनों को लेकर भी जिनपिंग ने चेतावनी दी. जिनपिंग ने ताइवान को चीन का हिस्सा बताने की चीनी सरकार की बात को दोहराया.
जिनपिंग ने कहा, ''हम दुनिया के लिए अपने दरवाजों को बंद नहीं करेंगे, हम विदेशी निवेशकों के लिए नियमों को आसान करेंगे.''
बीजिंग में बीबीसी संवाददाताओं की रिपोर्ट के मुताबिक, जिनपिंग ने पार्टी में अनुशासन बढ़ाने का भी ज़िक्र किया. इसके अलावा उन्होंने क़रीब 10 लाख अधिकारियों को भ्रष्टाचार पर दी सज़ा का भी ज़िक्र किया.

इमेज स्रोत, Getty Images
सम्मेलन को लेकर बीजिंग में कैसा है माहौल?
इस सम्मेलन के लिए बीजिंग में त्योहार जैसा माहौल है. बीजिंग की सड़के बैनरों से पटी हुई हैं. सुरक्षा के मद्देनज़र राजधानी को हाई अलर्ट पर रखा गया है.
इस हफ्ते रेलवे स्टेशनों पर लंबी कतारें और अतिरिक्त ट्रांसपोर्ट हब्स साफ़ दिखती हैं. इस सम्मेलन का असर व्यापार पर भी पड़ा है.
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेस्त्रां, जिम और नाइटक्लब को बंद करवाया गया है.

इमेज स्रोत, Getty Images
फिर से लिखा जाएगा संविधान?
चीन की सरकारी मीडिया का कहना है कि पार्टी अपने संविधान को फिर से लिख सकती है, ताकि जिनपिंग की वर्क रिपोर्ट और राजनीतिक विचारों को इसमें शामिल किया जा सके. ऐसे करने से जिनपिंग का क़द पार्टी के पूर्व दिग्गजों माओ त्से तुंग और डेंग शियाओ पिंग जितना हो जाएगा.
बीबीसी के बीजिंग संवाददाता जॉन सडवर्थ का कहना है कि कुछ लोग शी जिनपिंग को माओ के बाद का सबसे ताक़तवर नेता मान रहे हैं. कांग्रेस पर पैनी नज़र रखी जा रही है ताकि उन संकेतों पर पता लगाया जा सके कि एक आदमी के हाथ में कितनी शक्ति दी जानी है.
जिनपिंग ने अपने शासन के दौरान पार्टी और चीनी समाज में नियंत्रण कसा है. लेकिन वो आम नागरिकों के बीच मिले विशाल समर्थन को इंजॉय भी कर रहे हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












