क्या होगा अगर दक्षिण कोरिया भी बनाना शुरू कर दे एटम बम?

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पूरी दुनिया उत्तर कोरिया को उसके लगातार विस्तार लेते परमाणु कार्यक्रमों की वजह से पहचानती है. उत्तर कोरिया के पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया में इस वजह से परमाणु हमले का संकट हमेशा बना रहता है.
सवाल उठ रहा है कि अगर दक्षिण कोरिया भी खुद को परमाणु शक्ति से संपन्न राष्ट्र बना दे तो उसके क्या परिणाम देखने को मिल सकते हैं.
दक्षिण कोरिया के राजनीतिक गलियारों में इस तरह की चर्चाएं गरम होने लगी हैं.
'2 साल में बना देंगे 100 परमाणु हथियार'
सोल नेशनल यूनिवर्सिटी में न्यूक्लियर इंजीनियरिंग के प्रोफ़ेसर सेओ ग्युन-युल बताते हैं, ''अगर दक्षिण कोरिया परमाणु हथियार बनाना शुरू कर देगा तो वह महज 2 साल के भीतर 100 परमाणु हथियार बना सकता है.''
प्रोफेसर सेओ ने साल 2015 में एक साप्ताहिक पत्रिका में लिखा था, ''परमाणु कार्यक्रम स्थापित करने के पीछे राजनीतिक प्रतिबद्धता सबसे महत्वपूर्ण है. हमारे पास पैसा और तकनीक सब कुछ है, यदि देश के नेता चाहेंगे तो दक्षिण कोरिया भी परमाणु शक्ति संपन्न हो सकता है.''

प्रतिबंधों का डर
हालांकि दक्षिण कोरिया के लिए परमाणु कार्यक्रम शुरू करना इतना आसान भी नहीं होगा, क्योंकि अगर वह ऐसा करता है तो उसे विश्व समुदाय से प्रतिबंध झेलने पड़ सकते हैं.
दक्षिण कोरिया में नेशनल डिप्लोमेटिक प्रोफेसर वांग इल-डो ने बीबीसी को बताया, ''साल 1970 में जब से परमाणु अप्रसार संधि अस्तित्व में आई, उसके बाद जिन देशों ने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार किया उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.''
दक्षिण कोरिया को डर है कि अगर वह परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत करता है तो उस पर उत्तर कोरिया से भी ज्यादा कड़े प्रतिबंध लगा दिए जाएंगे. दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था निर्यात पर आधारित है, प्रतिबंधों के चलते उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाने का डर है.
ऐसी स्थिति में चीन विशेषरूप से दक्षिण कोरिया की तरफ बहुत ज्यादा कड़ा रुख अपना सकता है. प्रोफेसर वांग कहते हैं, ''चीन, दक्षिण कोरिया पर प्रतिबंध लगाएगा तो, दक्षिण कोरिया को बहुत ज्यादा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा.''

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बिजली और मेडिकल क्षेत्र होगा प्रभावित
यहां तक कि दक्षिण कोरिया को बिजली और मेडिकल क्षेत्र में भी प्रतिबंध झेलने पड़ सकते हैं. कोरिया में बिजली उत्पादन का एक तिहाई हिस्सा परमाणु शक्ति पर निर्भर है.
कोरिया में परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए ईंधन आयात किया जाता है, दक्षिण कोरिया में यूरेनियम खदान नहीं है.
दक्षिण कोरिया में परमाणु संयंत्र के लिए ईंधन का आयात अंतरराष्ट्रीय संगठन न्यूक्लियर रॉ मटीरियल ग्रुप (एनएसजी) के हाथों में है. इस संगठन का संबंध अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस से है. दक्षिण कोरिया जैसे ही परमाणु हथियार बनाने की शुरुआत करेगा, उसे होने वाली ईंधन की आपूर्ति रोक दी जाएगी.

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साल 2014 में प्रकाशित नॉटिलस इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट में बताया गया है, ''यदि दक्षिण कोरिया को ईंधन की आपूर्ति रोकी गई तो उसे बहुत बड़े बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा.''
प्रोफेसर वांग कहते हैं, ''प्रतिबंधों के चलते दक्षिण कोरिया का मेडिकल क्षेत्र बहुत ज्यादा प्रभावित होगा, एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई करने के लिए रेडियोधर्मी सामग्री का ही उपयोग होता है.''
जानकारों के मुताबिक साफ तौर पर समझा जा सकता है कि दक्षिण कोरिया को अपने परमाणु कार्यक्रम में विस्तार का फ़ायदे से ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है.
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