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इस्लामिक स्टेट ने जारी किया 'बग़दादी का नया ऑडियो टेप'
चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी की है जिसे आईएस प्रमुख अबू बक्र अल-बग़दादी की आवाज़ समझा जा रहा है.
पिछले कुछ समय से बग़दादी की मौत को लेकर अटकलें लगाई जाती रही हैं. उनका आख़िरी ऑडियो बयान करीब एक साल पहले आया था. लेकिन इस ताज़ा ऑडियो टेप में उत्तर कोरिया की जापान और अमरीका को दी गई हालिया धमकियों का ज़िक्र है.
इसमें इराक में इस्लामिक स्टेट के गढ़ मोसुल की लड़ाई का भी ज़िक्र है जिसे जुलाई महीने में इराक़ी सेना ने चरमपंथियों के क़ब्ज़े से वापस ले लिया था.
बग़दादी पर अमरीका ने ढाई करोड़ डॉलर (करीब 164 करोड़ रुपये) का इनाम रखा है और जुलाई 2014 के बाद से उन्हें सार्वजनिक तौर पर देखा नहीं गया है.
रिकॉर्डिंग पर शक करने की फिलहाल वजहें नहीं: अमरीका
तीन साल पहले 2014 में अबू बक्र अल-बग़दादी को आख़िरी बार देखा गया था. उस वक्त एक वीडियो आया था जिसमें मोसुल की अल-नूरी मस्जिद में अबू बक्र अपने वफ़ादारों को संबोधित कर रहे हैं.
इस्लामिक स्टेट ने तब इराक़ के मोसुल पर कब्ज़ा कर उसे 'ख़िलाफ़त' घोषित किया था.
इस ऑडियो रिकॉर्डिंग पर अमरीकी सेना के प्रवक्ता रायन डिलन ने कहा, ''उनकी मौत को प्रमाणित किया जा सके, ऐसे सबूत न होने की वजह से हम मानते रहे हैं कि वो ज़िंदा हैं.''
वहीं अमरीकी ख़ुफ़िया सूत्रों के मुताबिक, "अभी रिकॉर्डिंग की पुष्टि करने के प्रयास जारी हैं लेकिन इसकी सत्यता पर शक़ करने की कोई वजह नहीं है. "
आम लोगों और क़ैदियों के प्रति क्रूर हिंसक रवैये के लिए कुख्यात चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट को इस साल सीरिया और इराक में अपने नियंत्रण वाला बड़ा भू-भाग गंवाना पड़ा है.
46 मिनट का है ऑडियो
आईएस से जुड़ी एक वेबसाइट ने 46 मिनट की ऑडियो रिकॉर्डिंग पोस्ट की है. पिछले साल नवंबर के बाद इस तरह का पहला संबोधन सामने आया है.
इस ऑडियो रिकॉर्डिंग में मोसुल के अलावा सीरिया में रक़्का और हामा के अलावा लीबिया के शहर सिर्त की लड़ाई का भी ज़िक्र किया गया है. इसमें जो आवाज़ है, वह कह रही है कि जो भी ख़ून बहाया गया है वो बेकार नहीं जाएगा.
रूस की मध्यस्थता से सीरिया संकट पर शुरू हुई शांति वार्ता का भी इसमें उल्लेख है, बाक़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग में धार्मिक बातें कही गई हैं.
माना जा रहा है कि अल-बग़दादी ने इराक-सीरिया सीमा पर आईएस के कब्ज़े वाले इलाके में शरण ले रखी है.
ताहिर इंस्टीट्यूट फ़ॉर मिडल इस्ट पॉलिसी के हासन हसन ने बीबीसी के लिए हाल ही में एक लेख में लिखा था कि अबू बक्र अल-बग़दादी कहां है, इसके बारे में चंद लोग ही जानते होंगे. इससे अमरीका के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है जिसने बग़दादी को खोजने के लिए विशेष दल लगाए हैं.
'बग़दादी के लिए छिपना ज़रूरी'
इस साल जून में रूस ने कहा था कि 28 मई को रक्का में रूसी हवाई हमले में अल बग़दादी के मारे जाने की बहुत संभावना है और इसके कुछ समय बाद ईरानी अधिकारियों ने कहा था कि निश्चित तौर पर बग़दादी की मौत हो चुकी है.
हालांकि, बग़दादी की मौत के दावे कई बार किए गए हैं और इन दावों पर अमरीका ने सवाल खड़े किए थे.
सुरक्षा मसलों के बीबीसी संवाददाता फ्रैंक गार्डनर का मानना है कि इससे लगता है कि अल बग़दादी ज़िंदा हैं या फिर ये कहा जा सकता है कि अगस्त तक वो ज़िंदा थे.
पश्चिमी देशों की ख़ुफ़िया एजेंसियां और इराक़ी सरकार भी रूस के हवाई हमलों में बग़दादी की मौत के दावे को नहीं मानती हैं.
फ़्रैंक के मुताबिक, बग़दादी के ज़िंदा होने की संभावना से चौतरफ़ा घिरे हुए आईएस के (रक्का में मौजूद) लड़ाकों का मनोबल बढ़ेगा लेकिन इससे आईएस की रणनीति में कोई बदलाव आने की संभावना कम लगती है.
फ्रैंक मानते हैं कि अल-क़ायदा के नेता डॉ अयमन अल ज़वाहिरी की तरह, आईएस के प्रमुख अल बग़दादी के लिए छिपना इतना ज़रूरी है कि वो सीधे किसी ऑपरेशन के लिए निर्देश दें, इसकी संभावना न के बराबर है.
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