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परमाणु परीक्षण कहां करता है उत्तर कोरिया?
उत्तर कोरिया ने साल 2006 से ले कर अब तक कुल 6 परमाणु परीक्षण किए हैं और हर बार उसने इसके लिए पुंगे-री पहाड़ी में बनी एक जगह का इस्तेमाल किया है.
माना जाता है कि उत्तर कोरिया के उत्तर-पूर्व की पहाड़ियों में मौजूद ये जगह परमाणु परीक्षण के लिए देश की सबसे महत्वपूर्ण जगह है और दुनिया का एकमात्र एक्टिव परमाणु परीक्षण जगह भी है.
क्यों ख़ास है ये जगह?
इस बारे में हमारे पास जो जानकारी है वो सैटलाइट के ज़रिए मिली तस्वीरों और उस स्थान पर उपकरणों की आवाजाही की ट्रेकिंग के ज़रिए मौजूद मिली जानकारी है.
उत्तर कोरिया पुंगे-री के पास माउंट मनटाप के नीचे बनी सुरंगों में परमाणु परीक्षण करता है.
उत्तर कोरिया पर नज़र रखने वाले समूह उसके परमाणु परीक्षणों के बारे में जानने के लिए इन सुरंगों में होने वाले खनन के काम पर अपनी नज़र रखते हैं.
तीन सितंबर को हुए परीक्षण से पहले अगस्त में सैटलाइट से मिली तस्वीरों के अधार पर कुछ जानकारों का कहना था कि इस जगह को परीक्षण के लिए तैयार किया जा रहा था.
उपकरणों से मिले संकेत
जानकारों का कहना था कि इस साल के आरंभ में इस पहाड़ में खनन का काम देखा गया है और सुरंगों के मुंह पर कुछ अनजाने उपकरणों को रखा गया है.
इस सुरंगों में हुक के आकार में ख़त्म होने वाले रास्ते के आख़िर में परीक्षण के लिए उपकरण रखे जाते हैं. इसके बाद विस्फोट से पहले इन सुरंगों को दोबारा भर दिया जाता है ताकि परमाणु परीक्षण से विकिरण के ख़तरे को कम किया जा सके.
चीन से जुड़ी उत्तर कोरिया की सीमा के पास बसे गांवों के बारे में हमारे पास अधिक जानकारी है लेकिन इन पहाड़ियों में बसे लोगों के बारे में ज़्यादा नहीं पता.
सीमा के पास बसे कई शहरों ने परीक्षण के बाद ज़मीन के नीचे होने वाली हलचल को अनुभव किया है.
कई शहरों में हलचल हुई
ग्लोबल टाइम्स के अनुसार सीमा से 10 किलोमीटर दूर यांजी में ज़मीन की कंपंन से डर कर स्कूल के बच्चे बाहर खुले में निकल आए थे.
उत्तर कोरिया का दावा है कि उसके ताज़ा परीक्षण में किसी तरह का परमाणु विकिरण लीक नहीं हुआ.
परीक्षणों के बाद चीन का न्यूक्लियर सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन, दक्षिण कोरिया का न्यूक्लियर सेफ्टी एंड सिक्योरिटी कमीशन परमाणु विकिरण के लिए इमरजेंसी टेस्ट करते हैं.
परमाणु परीक्षण से भूकंप?
उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर नज़र रखने वाले समूह 38नॉर्थ के विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी 2013 में किए परमाणु परीक्षण के बाद से वातावरण में विकिरण के सबूत पाए गए हैं.
समूह का कहना है कि उत्तर कोरिया के ताज़ा परीक्षण के बाद 6.3 तीव्रता का झटका आया था. लेकिन इसके कुछ देर बार एक और झटका आया था जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.6 थी.
उनका कहना है कि हो सकता है कि विस्फोट के बाद सुरंग गिर गई हो और इस तरह की घटना के बाद विकिरण का ख़तरा रहता है.
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