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अमरीका के प्रतिबंधों का ईरान ने दिया जवाब, मिसाइल खर्च में भारी इजाफ़ा
ईरान की संसद ने बीते रविवार को अपने परमाणु मिसाइल कार्यक्रम और रिवॉल्युशनरी गार्ड्स के लिए 50 करोड़ डॉलर से ज़्यादा की अतिरिक्त राशि मंज़ूर की है.
साथ ही सांसदों ने अमरीका की निंदा करते हुए 'अमरीका का नाश हो' के नारे लगाए.
अमरीका ने हाल ही में ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए हैं. और, ईरान ने इसके जवाब में ही ये कदम उठाया है.
ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी इरना के मुताबिक, इस फ़ैसले के बाद सरकार को परमाणु मिसाइल विकास कार्यक्रम और रिवॉल्युशनरी गार्ड्स के विदेशी अभियान (द क़ुद्स फ़ोर्स) के लिए 26 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त राशि जारी करनी होगी.
ईरानी रिवॉल्युशनरी गार्ड्स की क़द्स फ़ोर्स टीम सीरिया और इराक़ में ईरान के सैन्य अभियानों को संभालती है.
'अमरीका जान ले - ये हमारा पहला कदम है'
ईरानी संसद के स्पीकर अली लारिजानी ने इस फ़ैसले पर कहा, "अमरीकियों को ये जानना चाहिए कि ये हमारी पहली कार्रवाई है."
लारिजानी ने अमरीकी गतिविधियों और आतंक-निरोधी अभियानों के लिए आर्थिक पैकेज़ का समर्थन करने के बाद ये बात कही.
इस दौरान ईरानी संसद के 244 में से 240 सांसदों ने मतदान किया.
'अमरीका का नाश हो'
ईरानी संसद में इस आर्थिक पैकेज़ के समर्थन में फैसला आने के बाद सांसद 'अमरीका का ख़ात्मा हो' नारा लगाते देखे गए.
डोनल्ड ट्रंप के अमरीकी राष्ट्रपति बनने के बाद से ही दोनों देशों में तनाव बढ़ गया है.
अमरीका ने जुलाई महीने में ही ईरान के ख़िलाफ़ इसके परमाणु कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए नए प्रतिबंध लगाए हैं.
ईरानी संसद ने ये फ़ैसला इन प्रतिबंधों के लगने के बाद लिया है.
इस मामले में ईरान का तर्क ये है कि ये प्रतिबंध साल 2015 में हुए ईरान परमाणु समझौते के ख़िलाफ़ हैं.
क्योंकि, इस समझौते के तहत परमाणु कार्यक्रम की गति धीमी करने पर प्रतिबंधों को हटाने की बात हुई थी.
ट्रंप के बाद संबंधों में बढ़ा तनाव
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 2015 में हुए समझौते को 'सबसे ख़राब सौदा' बताया है और पिछले महीने उन्होंने इस समझौते से बाहर निकलने के लिए एक अहम शर्त को तोड़ दिया.
ईरान के उप विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है, "ये बिल बहुत ही शानदार है क्योंकि एक तरफ तो ये परमाणु समझौते की अवहेलना नहीं करता है और दूसरे पक्ष को बहाना बनाने का मौका भी नहीं देता."
इसके साथ ही उन्होंने कहा, "ईरान शत्रुतापूर्ण अमरीकी कार्रवाइयों का सामना करने की क्षमता रखता है."
अमरीका और ईरान के बीच साल 1980 के बाद से राजनयिक संबंध नहीं हैं.
पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान से सीधी बातचीत की पहल की थी, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे बंद कर दिया है.