पड़ोसियों से माफ़ी नहीं, हर्जाना मांगेगा क़तर

क़तर के अटॉर्नी जनरल

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क़तर ने कहा है कि खाड़ी देशों के उस पर लगाए प्रतिबंध अनुचित हैं और वो इन प्रतिबंधों के कारण उसे हुए आर्थिक नुक़सान के लिए पड़ोसी देशों से हर्जाना मांगेगा.

क़तर पर 'आंतकवाद का पोषण' करने का आरोप लगाते हुए सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मिस्र ने पिछले महीने उससे राजनयिक रिश्ते तोड़ दिए थे. साथ ही इन देशों ने क़तर पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए थे.

क़तर को इन देशों की कुछ मांगों की सूची सौंपी गई थी जिन्हें मानने से क़तर ने इनकार कर दिया है.

इन मांगों का जवाब देने के लिए क़तर की समयसीमा बुधवार को ख़त्म हो गई.

सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों की काहिरा में बैठक हुई जिसमें कहा गया कि उन्हें अफ़सोस है कि क़तर ने उनकी मांगों को ठुकरा दिया है.

क़तर ने कहा है कि पड़ोसी देशों के ज़मीन, जल और वायुमार्ग से संबंध तोड़ने से उसके देश की कंपनियों और नागरिकों को आर्थिक नुक़सान हुआ है.

थानी

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इमेज कैप्शन, क़तर के अमीर तमीम बिन हमद अल-थानी देश के पड़ोसियों के साथ विवादों में फंसे हैं.

क़तर ने कहा है कि पड़ोसी देशों से हर्जाना मांगने के लिए एक समिति का गठन किया गया है.

क़तर सरकार का कहना है हर्जाना मांगने वाले इसमें बढ़ा हुआ हवाई किराया भी शामिल कर सकते हैं, क्योंकि खाड़ी देशों के प्रतिबंधों के कारण एयरलाइंस को अपने वायुमार्गों में बदलाव करना पड़ा है.

इससे पहले, सऊदी अरब के नेतृत्व में क़तर पर प्रतिबंध लगाने वाले चार अरब देशों ने कहा था कि क़तर का मांगें न मानना क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा है.

सऊदी अरब, बहरीन, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात की ओर से जारी एक बयान में नए प्रतिबंधों की चेतावनी भी दी गई थी.

प्रतिबंध हटाने के लिए इस समूह ने क़तर से मीडिया नेटवर्क अल जज़ीरा को बंद करने, ईरान से रिश्ते कम करने और चरमपंथियों को समर्थन ख़त्म करने की मांग रखी थी.

इसी सप्ताह क़तर ने सभी आरोपों को नकारते हुए मांगें मानने से इनकार कर दिया था.

अमरीकी विदेश मंत्री सोमवार को कुवैत की यात्रा कर सकते हैं जो इस संकट में मध्यस्थता कर रहा है.

क़तर

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ये क़तर का अपमान है

क़तर के विदेश मंत्री शेख़ मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने इसे ''ऐसी घेराबंदी कहा है जो स्पष्ट रूप से आक्रामकता और क़तर का अपमान है.'

क़तर में क़रीब 27 लाख लोग रहते हैं. दुनिया का ये सबसे अमीर देश अपने लोगों की ज़रूरतें पूरी करने के लिए आयात पर निर्भर है.

ज़मीनी रास्ते बंद होने के बाद अब खाने पीने की चीज़ें हवाई और समुद्री रास्ते से क़तर लाई जा रही हैं.

थानी का कहना है कि उनका देश अनंतकाल तक इस तरह रह सकता है.

अल जज़ीरा

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इमेज कैप्शन, अरब देशों ने क़तर से अपने मीडिया नेटवर्क अल जज़ीरा को बंद करने की मांग भी की है.

कब क्या हुआ?

5 जून: सऊदी अरब, मिस्र समेत कई अरब देशों ने क्षेत्र को अस्थिर करने का आरोप लगाते हुए राजनयिक संबंध ख़त्म कर लिए थे. क़तर एयरवेज़ के लिए वायु क्षेत्र भी बंद कर दिया गया था.

8 जून: क़तर ने कहा था कि वो अपनी विदेश नीति की स्वतंत्रता का समर्पण नहीं करेगा, अमरीका ने खाड़ी देशों की एकता की अपील की थी.

23 जून: क़तर को 13 मांगों की सूची थमाई गई थी और इन्हें मानने के लिए 10 दिन का समय दिया गया था. इसमें अल जज़ीरा न्यूज़ चैनल बंद करने, तुर्की का सैन्य अड्डा बंद करने, मुस्लिम ब्रदहुड से संबंध ख़त्म करने और ईरान से राजनयिक रिश्ते तोड़ने की मांग की गई थी.

1 जुलाई: क़तर के विदेश मंत्री ने कहा कि खाड़ी देशों को नहीं मानेंगे लेकिन सही परिस्थितियों में बातचीत के लिए तैयार है.

3 जुलाई: सऊदी अरब और उसके सहयोगियों ने मांगे मानने के लिए क़तर को दिया अल्टीमेटम 48 घंटे बढ़ा दिया था.

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