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उत्तर कोरियाई मिसाइल से अमरीका को कितना ख़तरा
ये पहला मौका है जब उत्तर कोरिया ने इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) की सफलतापूर्वक परीक्षण करने का दावा किया है.
उत्तर कोरिया का दावा है कि इस मिसाइल के ज़रिए वो अब अमरीका के ज़मीनी इलाक़े तक मार करने में सक्षम हो गया है.
इससे पहले अमरीका की ओर से कहा गया है कि जापान के सागर में एक मिसाइल गिरा है लेकिन उससे उत्तरी अमरीका को कोई ख़तरा नहीं है.
उत्तर कोरिया इन दिनों बेहद कम समय अंतराल पर मिसाइल टेस्ट कर रहा है, जिससे इलाके में तनाव काफ़ी बढ़ा है.
उत्तर कोरिया के सरकारी टेलीविजन के मुताबिक उत्तर कोरियाई राष्ट्रपति किम जोंग उन की मौजूदगी में हाउसोंग-14 मिसाइल का परीक्षण किया गया.
इसमें ये भी बताया गया कि मिसाइल 2,802 किलोमीटर की दूरी तय करने में कामयाब रहा और समुद्र में टारगेट को निशाना बनाने से पहले उनसे 933 किलोमीटर की दूरी भी तय की.
इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) क्या है?
लंबी दूरी तय करने वाला मिसाइल, जो ख़ास तौर पर परमाणु हथियार के लिए डिज़ाइन किया जाता है.
इस मिसाइल कम से कम 5,500 किलोमीटर तक निशाना लगा सकता है और निशाना लगाने से पहले ये 10 हज़ार किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है.
उत्तर कोरिया ने दो तरह के इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) का डिसप्ले किया है- पहला तो केएन-08 है, जिसकी रेंज 11,500 किलोमीटर की है और दूसरी मिसाइल का रेंज 10,000 किलोमीटर है.
उत्तर कोरिया के सामने दूसरी चुनौती इस मिसाइल के लिए परमाणु हथियार विकसित करने की है.
कितनी दूरी तय कर सकती है? क्या इस मिसाइल से अमरीका को निशाना बनाना संभव है?
बीबीसी न्यूज़ के संवाददाता स्टीफ़न इवांस ने यही सवाल यूनियन ऑफ़ कन्सर्न्ड साइंटिस्ट के भौतिक विज्ञानी डेविड राइट से पूछा.
उन्होंने बताया, "अगर मिसाइल संबंधी रिपोर्ट सही है, तो ये मिसाइल 6,700 किलोमीटर तक निशाना लगा सकता है. यानी इससे अमरीका के 48 राज्यों को टारगेट नहीं किया जा सकता. लेकिन अलास्का और हवाई द्वीप के कुछ हिस्सों तक ये निशाना लगा सकता है."
वैसे क्या उत्तर कोरिया, अमरीका पर कभी हमला कर सकता है, इस बारे में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने जनवरी में ट्वीट किया था, "ऐसा नहीं होगा."
लेकिन ज़्यादातर विश्लेषकों के मुताबिक अगले पांच साल में ये संभव हो सकता है.
क्या है दुनिया की प्रतिक्रिया?
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेई-इन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को मामले में दखल देने को कहा है.
जापान की मुख्य कैबिनेट सेक्रेटरी याशीहिदे सुगा ने कहा, "उत्तर कोरिया की लगातार उकसाने की कोशिश को एकदम स्वीकार नहीं किया जा सकता."
जापानी प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे अमरीका और दक्षिण कोरिया के साथ एकजुट होकर उत्तर कोरिया पर दबाव बनाने की अपील पहले ही कर चुके हैं.
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