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उत्तर कोरिया ने आख़िर परमाणु बम कैसे बनाया?
अमरीका और उत्तर कोरिया के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन लंबी दूरी के मिसाइल परीक्षण और परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में लगे हैं.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप चाहते हैं कि उत्तर कोरिया परमाणु कार्यक्रम बंद करे. अमरीका ने कहा है कि उत्तर कोरिया के मामले में लक्ष्य हासिल करने के सारे विकल्प खुले हैं.
दूसरी तरफ़, उत्तर कोरिया ने चेतावनीदी है कि अगर अमरीका उसके ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई करता है तो वह बेहद शक्तिशाली हमला करेगा.
'शांति के लिए उत्तर कोरिया ख़तरा'
लेकिन सवाल यह उठता है कि दुनिया से अलग-थलग और एक ग़रीब देश ने परमाणु हथियार कैसे हासिल कर लिया? इस पर बीबीसी रेडियो कार्यक्रम के लिए रूथ एलेक्जेंडर ने विशेषज्ञों की राय ली है.
उत्तर कोरिया ने इस साल दो बड़े सैन्य प्रदर्शन, कई मिसाइल परीक्षण और छह परमाणु परीक्षणों का दावा कर दुनिया के सामने हेकड़ी भरी थी. उत्तर कोरिया ने इसी साल कहा था कि वह किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार है.
अमरीकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने जापानी सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा था, ''एशिया प्रशांत की शांति के लिए उत्तर कोरिया ख़तरा है. किसी भी हमले, चाहे वह परमाणु हमला ही क्यों न हो, उसमें उसे हारना होगा.''
परमाणु हमले की आशंका
उत्तर कोरिया के बम बनाने की तकनीक हासिल करने की बात इतिहास के पन्नों में छुपी है. इसे जानने के लिए अक्तूबर 1950 में जाना होगा.
तब कोरियाई युद्ध शुरू हुआ था. इसमें लाखों लोगों की जान गई थी. इस लड़ाई के बाद ही उत्तर कोरिया को लगा कि उसके पास परमाणु हथियार होने चाहिए. उत्तर कोरिया को लगता था कि अमरीका उसके ख़िलाफ़ परमाणु हथियार का इस्तेमाल कर सकता है.
कोरियाई युद्ध ख़त्म होने के बाद उत्तर कोरिया ने न्यूक्लियर रिसर्च पर काम शुरू कर दिया था. उसने इसे पहले बिजली उत्पादन से जोड़ा. इसके लिए उसने कम्युनिस्ट सहयोगियों से मदद ली.
विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर यूरेनियम से बिजली हासिल करने का सिस्टम विकसित कर लिया जाए तो हथियार तक पहुंचना बहुत मुश्किल नहीं होता है.
'पाकिस्तान बना मददगार'
1990 के दशक में कम्युनिस्ट यूनियनों में बिखराव के बाद उत्तर कोरिया ने नए दोस्त की तलाश शुरू की.
ब्रिगेडियर फ़िरोज़ हसन ख़ान ने बीबीसी रेडियो के एक कार्यक्रम में बताया कि उत्तर कोरिया को नए दोस्त के रूप में पाकिस्तान मिला. उन्होंने बताया कि इन दोनों देशों के बीच आधिकारिक बम और गोपनीय बम को लेकर डील हुई.
ख़ान ने बताया कि उत्तर कोरिया और पाकिस्तान के बीच लिक्विड फ्यूल्ड बैलिस्टिक मिसाइल टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र करने के समझौते हुए. दोनों देशों के बीच आधिकारिक समझौता हुआ कि उनके वैज्ञानिक मिसाइल टेक्नोलॉजी पर साथ मिलकर काम करेंगे.
उत्तर कोरिया ने मिसाइल विकसित करने में पाकिस्तान की मदद की और पाकिस्तानी वैज्ञानिक अब्दुल क़दीर ख़ान के रिसर्च सेंटर ने उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार विकसित करने में.
पाकिस्तान को न्यूक्लियर स्टेट बनाने का श्रेय क़दीर ख़ान को ही दिया जाता है. इसके बाद दोनों देशों के संबंधों में गर्मी आई. ख़ान पर आरोप है कि उन्होंने दूसरे देशों को न्यूक्लियर तकनीक से परिचय कराया.
विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान ने उत्तर कोरिया और क़दीर ख़ान के रिसर्च सेंटर से मदद लेने की अनुमति दी. इसके बदले उत्तर कोरिया ने पाकिस्तान को मिसाइल टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग दी.
दूसरी तरफ़ पाकिस्तानी वैज्ञानिकों ने उत्तर कोरिया के वैज्ञानिकों को यूरेनियम इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी. दोनों देशों के बीच यह संबंध तब सामने आया जब इस्लामाबाद में एक वैज्ञानिक समेत तीन लोगों की मौत हुई.
अंतरराष्ट्रीय हथियार निरीक्षक डेविड ओ ब्रायन का कहना है कि हथियार बनाने के लिए उत्तर कोरिया को सामान चीन से होते हुए पहुँचता था. ये सामान व्यापार की आड़ में वहाँ पहुँचता था.
ब्रायन कहते हैं, "उत्तर कोरिया के लिए चीन के रास्ते सामान हासिल करना कतई मुश्किल नहीं था. चीन में सीमा पर बहुत अधिक सख्ती नहीं रहती थी."
शायद यही वजह है कि तमाम सख्तियों और अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों के बावजूद उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम पर आगे बढ़ता रहा है और अमरीका और दुनिया की दूसरी ताक़तों को ठेंगा दिखाता रहा है.