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मिस्र पर लगा सऊदी अरब को दो द्वीप बेचने का आरोप
मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़तह अल-सीसी ने सऊदी अरब के साथ एक विवादास्पद संधि को मंजूरी दे दी है.
मिस्र ने इस संधि के तहत आधिकारिक तौर पर लाल सागर के तिरान और सनाफियर द्वीपों को सऊदी अरब को दे दिया है.
साल भर पहले ही हुई ये डील
सऊदी अरब और मिस्र के बीच द्वीप सौंपने की डील एक साल पहले सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सौद की मिस्र यात्रा के दौरान हुई थी.
मिस्र की संसद ने इसके एक साल बाद इसे मंजूरी दे दी है.
सरकार के खिलाफ़ प्रदर्शन
संसद ने अपना पक्ष रखते हुए इस मामले को अपने अधिकार क्षेत्र में बताया था. इसके बाद से काहिरा में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं.
औऱ, इन प्रदर्शनों में सरकार पर द्वीपों को बेच देने का आरोप लगाया जा रहा है.
वहीं, विपक्षियों ने अल-सीसी पर संविधान का उल्लंघन करने और दो द्वीप देकर सऊदी अरब को खुश करने का आरोप लगाया है.
एक आरोप ये भी है कि सऊदी अरब साल 2011 में मोहम्मद मोर्सी की सरकार के सैन्य तख़्ता-पलट के समय से अल-सीसी को आर्थिक मदद दे रहा है.
लेकिन कानूनी लड़ाई है जारी
इन द्वीपों के हस्तातंरण पर कानूनी लड़ाई अभी जारी है. एक अदालत ने सरकार के इस फैसले को अवैध करार दिया है तो वहीं दूसरी अदालत ने इस फैसले को मंजूरी दी है.
अब संवैधानिक अदालत इस मामले में अंतिम फैसला देगी.
मिस्र के राष्ट्रपति ने दी है सफाई
मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतेह अल सीसी ने इस मुद्दे पर कहा है कि ये दोनों द्वीप हमेशा से सऊदी अरब के थे.
उन्होंने कहा है कि सऊदी अरब ने साल 1950 में मिस्र से इनकी सुरक्षा के लिए अपनी सेना को तैनात करने को कहा था.
इसराइल ने दो बार किया दोनों द्वीपों पर कब्जा
लाल सागर में एक दूसरे से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित ये द्वीप रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं. अक़ाबा की खाड़ी के मुहाने पर स्थित तिरान द्वीप तिरान जलसंधि के साथ है. इसराइल इसी रास्ते से होते हुए लाल सागर में प्रवेश करता है.
मिस्र के सैनिक साल 1950 से इन द्वीपों पर तैनात है.
इतिहास में दो मौके ऐसे भी आए हैं जब इसराइल ने इन दोनों द्वीपों पर कब्जा कर लिया.
साल 1965 में स्वेज़ संकट के दौरान मिस्र के सैनिकों ने इस द्वीप की रक्षा करते हुए इसराइल से टक्कर ली.
हालांकि, दोनों बार ये द्वीप मिस्र को लौटा दिए गए.
अब्दुल फ़तह अल सीसी पर साल 2016 के अप्रैल महीने में इस डील को मंजूरी देने के बाद से मिस्र की जमीन सऊदी अरब को बेचने का आरोप लग रहा है.
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