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मिस्र: होस्नी मुबारक 2011 में प्रदर्शनकारियों की मौत मामले में बरी
मिस्र की सबसे बड़ी अपील कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को 2011 के विद्रोह के दौरान सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की हत्या की साज़िश रचने के आरोप से बरी कर दिया है.
मुबारक को 2012 में दोषी ठहराए जाने के बाद उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई थी लेकिन इस केस की दो बार फिर से सुनवाई हुई.
गुरूवार को अपील कोर्ट का आया फ़ैसला अंतिम होगा. इसका मतलब हो सकता है कि 88 साल के बुज़ुर्ग और बीमार होस्नी मुबारक को हिरासत से आज़ाद कर दिया जाएगा.
मुबारक को गबन के एक मामले में तीन साल जेल की सज़ा पूरी करने के बावजूद एक सैन्य अस्पताल में नज़रबंद रखा गया है.
मई 2015 में एक जज ने फ़ैसला सुनाया था कि मुबारक को हिरासत से रिहा किया जा सकता है.
हालांकि राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी की सरकार कथित तौर पर उन्हें रिहा करने में इच्छुक नहीं थी, क्योंकि इस क़दम के बाद सार्वजनिक प्रतिक्रिया कुछ भी हो सकती थी.
सीसी मुबारक सरकार में सैन्य ख़ुफ़िया प्रमुख थे और उन्होंने 2013 में लोकतांत्रिक तरीक़े से चुने गए मुबारक के उत्तराधिकारी मोहम्मद मोर्सी को हटाने के लिए हुए सैन्य तख़्तापलट की अगुवाई की थी.
काहिरा, एलेक्ज़ेडरिया, स्वेज़ और मिस्र के कई अन्य शहरों में हुए विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए सेना का इस्तेमाल किया गया था जिसमें माना जाता है कि 800 से ज़्यादा लोगों की जान गई थी.
18 दिनों तक चले इन प्रदर्शनों के चलते 30 साल तक सत्ता में क़ाबिज़ रहने के बाद मुबारक को राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा था.
मुबारक ने प्रदर्शनकारियों की हत्या के आदेश देने के आरोपों से इनकार किया था और ज़ोर देकर कहा था कि इतिहास उन्हें एक देशभक्त के रूप में याद करेगा जिसने अपने देश की सेवा नि:स्वार्थ भाव से की.
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