क़तर: पड़ोसियों की मांगें मानने का मतलब

राजनयिक संकट में घिरे क़तर और उसके पड़ोसी देशों के बीच मध्यस्तता की कोशिशें नाकाम होती जा रही हैं.

इसी महीने क़तर को 'आतंकवाद को पोषण करने वाला देश' बताते हुए कुछ खाड़ी देशों (सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, यमन और लीबिया) ने को उसके साथ अपने राजनयिक संबंध ख़त्म कर उस पर प्रतिबंध लगा दिए थे.

अब सऊदी अरब, मिस्र, सयुंक्त अरब अमीरात और बहरीन ने क़तर को अपने मांगों की लिस्ट सौंप दी है और इस पर अमल करने के लिए दस दिन का वक्त दिया है.

बीबीसी अरबी सेवा के आमिर रवाश ने क़तर के विरोधियों की कुछ अहम मांगों की पड़ताल की.

क़तर की मीडिया को ख़त्म करना

इस संकट के केंद्र में है क़तर में मौजूद मीडिया के दफ्तर. क़तर की सरकार न्यूज़ मीडिया में छपी एक विवादित रिपोर्ट के बाद ये संकट गहरा गया था.

क़तर पर आरोप है कि वो क़तर समर्थित अल जज़ीरा नेटवर्क का इस्तेमाल 'उग्र देशद्रोह' फैलाने में कर रहा है. उनका आरोप है कि ये मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्यों को एक मंच देता है जिसे सऊदी अरब, सयुंक्त अरब अमीरात और बहरीन "आतंकवादी" समूह मानते हैं.

साल 2014 में क़तर और कुछ अन्य देशों के बीच अल-जज़ीरा को ले कर कुछ विवाद हुआ था. इसके बाद से सऊदी अरब ने उसके चैनल मुबाशेर मिस्र (लाइव इजिप्ट) पर रेक लगा दी थी. बीते सप्ताह इन चारों ने अपने देशों में अल-जज़ीरा की वेबसाइट पर भी रोक लगा दी थी.

अगर क़तर अपनी ज़िद पर कायम रहते हुए ये मांग मान लेता है तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना एक अहम हथियार खो देगा. प्रोपोगैंडा की बात की जाए तो अल-जज़ीरा क़तर की बड़ी ताकत है.

तुर्की सैन्य अड्डों को बंद करना

जैसे-जैसे इस महीने क़तर पर दवाब बनना शुरू हुआ, उसकी मदद के लिए तुर्की सामने आया.

इस संबंध में कुछ समय पहले बने बिल को तुर्की की संसद ने जल्द ही स्वीकृति दे दी ताकि क़तर में उसके सैन्यबलों की तैनाती की जा सके.

अब खाड़ी देशों की मांग है कि क़तर को इस सैन्य अड्डे को बंद करना होगा. तुर्की के समाचार चैनल एनटीवी के अनुसार वहां के रक्षा मंत्री फिक्री इसिक ने इस मांग को खारिज कर दिया है.

इस संकट के शुरू होने के समय से ही तुर्की क़तर को खाना और अन्य मदद मुहैया करा रहा है. राष्ट्रपति रिचेप तैयप अर्दोआन ने क़तर को अलग-थलग करने को 'अमानवीय' कहा है और वादा किया है कि वो क़तर की हरसंभव मदद करेंगे.

मध्यपूर्व में मौजूद अमरीका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा अल-उबैद क़तर में ही है.

लेकिन साफ़ तौर पर क़तर को अपने तुर्की साथियों की मदद की दरकार है क्योंकि अमरीका उस संकट पर कुछ भी कहने या मदद करने पर कतरा रहा है.

मुस्लिम ब्रदरहुड को समर्थन देना बंद करे क़तर

साल 2011 में हुए राजनितिक बदलाव में क़तर और उसके पड़ोसियों के अलग-अलग खेमों का समर्थन किया था.

जब 2013 में मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मोरसी को गद्दी से हटाया गया तब क़तर ने मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्यों को पनाह दी.

मुस्लिम ब्रदरहुड मिस्र का सबसे पुराना और सबसे बडा़ इस्लामी संगठन है. इस संगठन ने कई दशक तक सत्ता पर काबिज रहे राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को बेदखल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

2014 में क़तर और इसके पड़ोसियों के बीच पैदा हुए इस संकट के राजनयिक बाद क़तर ने इस दल के सदस्यों को देश से बाहर जाने के लिए कहा था.

हालांकि, लेकिन इस क़दम का यह मतलब कतई नहीं था कि उसने इस इस्लामी समूह का समर्थन देना बंद कर दिया.

क़तर पर सऊदी अरब, मिस्र, सयुंक्त अरब अमीरात और बहरीन ने "आतंकवादी समूहों" की मदद करने का आरोप लगाया है और उसे इस संगठनों और उससे संबंधित व्यक्तियों की एक सूची सौंपी है.

क़तर ने खुद के ऊपर लगे आरोपों से इंकार किया है.

ईरान से दूरी बनाए क़तर

बीते कई सालों से खाड़ी संकट के दौरान सऊदी अरब ईरान को एक शत्रु देश की तरह देखता आया है.

दोनों देश सीरिया और यमन में कथित इस्लामिक समूह इस्लामिक स्टेट ख़िलाफ़ चल रही लड़ाई में एक दूसरे के विरुद्ध खड़े नज़र आए थे.

सऊदी अरब ने क़तर पर पूर्वी सऊदी अरब के शिया बहुल इलाके में "क़ातिफ़ में ईरान-समर्थित चरमपंथी गुटों की मदद करने" आरोप लगाता आया है. हालांकि क़तर इन आरोपों का खंडन करता आया है.

ईरान के साथ क़तर के रिश्ते उसके पड़ोसियों से अलग हैं और उन्हें पसंद नहीं.

ईरान ने क़तर पर प्रतिबंध लगने के बाद खाने की समस्या से जूझने के लिए विमान भर कर खाद्य मदद भेजी है.

सऊदी अरब, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के क़तर के विमानों के लिए हवाई रास्ते बंद करने के बाद ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र क़तर के लिए खोल दिए हैं.

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