ट्रंप पर ईरान का तंज़, सऊदी को लोकतंत्र-उदारवाद का गढ़ बताया

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ईरान ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के आरोपों का सख़्त लहजे में जवाब देते हुए अमरीका और सऊदी अरब दोनों पर निशाने साधा है.
डोनल्ड ट्रंप ने रविवार को सऊदी अरब के रियाद में कहा था कि ईरान मध्य पूर्व में सामुदायिक हिंसा और चरमपंथ को बढ़ावा दे रहा है.
ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने जवाब में सऊदी अरब पर तंज़ कसते हुए उसे 'लोकतंत्र और उदारवाद का गढ़' कहा है.
'लोकतंत्र और उदारवाद का वो गढ़'
हाल में अपनी पहली विदेश यात्रा पर सऊदी अरब गए अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ अरबों डॉरल की हथियारों का सौदा किया है.
जवाद ज़रीफ़ ने ट्रंप के भाषण का एक हिस्सा ट्वीट करते हुए लिखा, 'अभी अभी चुनावों से फ़ारिग़ हुए ईरान पर अमरीका ने लोकतंत्र और उदारवाद के उस गढ़ से हमला किया है. यह विदेश नीति है या 480 बिलियन डॉलर के लिए सऊदी अरब का दोहन है.'

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अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रियाद में 40 से ज़्यादा मुस्लिम देशों के नेताओं को संबोधित किया और ईरान पर आरोप लगाए थे.
खाड़ी क्षेत्र में सोशल मीडिया पर ट्रंप के भाषण को लेकर कई तरह की तीखी प्रतिक्रियाएं भी आईं.
कुछ लोगों ने ध्यान दिलाया कि सऊदी अरब में महिलाओं के गाड़ी चलाने पर पाबंदी है और वहां लोकतांत्रिक चुनाव भी नहीं होते हैं.
कई लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान में हाल में भारी मतदान वाला चुनाव संपन्न हुआ है.
'कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद नहीं'
बीबीसी सुरक्षा संवाददाता फ़्रैंक गार्डनर के मुताबिक, ट्रंप आमतौर पर तीखी भाषा के लिए जाने जाते हैं लेकिन इस बार वो अपने तरीके के उलट बेहद संयमित रहे.
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के भाषण से उनमें बदलाव दिखा है. ट्रंप मुस्लिम देशों के साथ अपने रिश्तों को फिर से परिभाषित करने की कोशिश कर रहे हैं.
ट्रंप ने अपने भाषण में एक बार भी 'कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद' जैसे वाक्य का इस्तेमाल नहीं किया.
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