मुस्लिम देशों को लेकर बदल रहा है ट्रंप का नजरिया?

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- Author, फ्रैंक गार्डनर
- पदनाम, बीबीसी सुरक्षा संवाददाता
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रियाद में 40 से ज्यादा मुस्लिम देशों के नेताओं को संबोधित करते हुए सऊदी अरब की मेजबानी की दिल खोलकर तारीफ़ की.
लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण का इस्तेमाल अरब और मुस्लिम देशों को सख़्त संदेश देने के लिए भी किया.
उन्होंने स्पष्ट किया कि या तो चरमपंथ को बढ़ावा देने वाली विचारधारा से अब निबट लो या फिर आने वाली कई पीढ़ियों तक इसके साथ संघर्ष करते रहो.
ट्रंप आमतौर पर तीखी भाषा के लिए जाने जाते हैं लेकिन इस बार वो अपने तरीके के विपरीत बेहद संयमित रहे.
ट्रंप ने सऊदी अरब के क्षेत्रीय प्रतिद्वंदी ईरान की बार-बार आलोचना की और इससे खाड़ी के अरब देशों के नेता ज़रूर ख़ुश हुए होंगे.
अपने पूर्ववर्ती बराक ओबामा की तरह मौजूदा अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में मानवाधिकारों या प्रजातंत्र का कोई उल्लेख नहीं किया.
हालांकि उन्होंने महिलाओं के दमन की आलोचना ज़रूर की.

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खाड़ी क्षेत्र में सोशल मीडिया पर ट्रंप के भाषण के लेकर कई तरह की तीखी प्रतिक्रियाएं भी आईं. कुछ लोगों ने ध्यान दिलाया कि सऊदी अरब में महिलाओं के गाड़ी चलाने पर पाबंदी है और यहां लोकतांत्रिक चुनाव भी नहीं होते हैं.
दूसरी ओर ईरान में, जिस पर ट्रंप ने मध्य पूर्व के मौजूदा संघर्षों के पीछे होने का आरोप लगाया, महिलाएं गाड़ी चला सकती हैं और वहां हाल ही में स्वतंत्र राष्ट्रपति चुनाव हुए हैं.
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के भाषण से उनमें बदलाव दिखा है. ट्रंप मुस्लिम देशों के साथ अपने रिश्तों को फिर से परिभाषित करने की कोशिश कर रहे हैं.
ट्रंप अब तक मुसलमानों के ख़िलाफ़ कई विवादित बयान दे चुके हैं. बीते साल दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, "मुझे लगता है इस्लाम हमसे नफ़रत करता है."
ट्रंप ने अपने भाषण में एक बार भी 'कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद' जैसे वाक्य का इस्तेमाल नहीं किया.
ट्रंप इससे पहले इसका इस्तेमाल करते रहे हैं और दुनियाभर के मुसलमान इसे अपमानजनक मानते रहे हैं.













