जाधव जैसे मामलों में ICJ के फ़ैसलों की अनदेखी होती रही है

    • Author, देवांशु गौड़
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग

पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव की फ़ांसी टालने के लिए हेग स्थ‍ित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस यानी आईसीजे ने अपना फैसला सुनाया है.

कुलभूषण जाधव का मामला ऐसे दुर्लभ मामलों में से है जिसमें एक देश ने दूसरे देश में अपने नागरिक की फांसी की सज़ा रोकने के लिए अतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है.

अब तक ऐसे तीन मामले हैं जिनमें अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले के बावजूद लोगों को फांसी दे दी गई.

जानिए इन मामलों के बारे में ..

1. पराग्वे बनाम अमरीका

अपनी तरह के इस पहले मामले में अप्रैल, 1998 में पराग्वे ने अमरीका के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था.

इस मामले में अमरीका ने पराग्वे के नागरिक ऐंगल फ्रासिंस्को बीयर्ड को मौत की सज़ा सुनाई थी.

इस मामले में सवाल तत्काल सुनवाई को लेकर था, क्योंकि दो हफ्ते बाद ही इस मौत की सज़ा पर अमल किया जाना था.

अंतरराष्ट्रीय अदालत ने अमरीका से फ्रांसिस्को बीयर्ड की मौत की सज़ा पर तब तक अमल ना करने को कहा जब तक कि सुनवाई पूरी नहीं हो जाती.

लेकिन अमरीका ने अंतरराष्ट्रीय अदालत को अनसुना करते हुए 14 अप्रैल की निर्धारित तारीख को मौत की सज़ा दे दी.

2. लाग्रांद मामला - जर्मनी बनाम अमरीका

ये मामला उस समय का है जब 1982 में अमरीका के ऐरिज़ोना में लाग्रांद और उसके भाई ने एक बैंक में डकैती डालने की कोशिश की थी.

इस कोशिश में एक व्यक्ति मारा गया और एक महिला घायल हुई.

जमर्न नागरिक लाग्रांद को मौत की सज़ा सुनाई गई.

इस मामले में सज़ायाफ्ता लाग्रांद को ये नहीं बताया गया कि उसे दूतावास से कानूनी मदद पाने का अधिकार है.

अंतरराष्ट्रीय अदालत ने अमरीका से सुनवाई पूरी होने और फैसला आने तक मौत की सज़ा रोकने का आदेश दिया, पर अमरीका नहीं माना और लाग्रांद को मौत की सज़ा दे दी गई.

अवीना मामला - मैक्सिको बनाम अमरीका

जनवरी 2003 में मैक्सिको ने अंतरराष्ट्रीय अदालत में अमरीका के खिलाफ़ गुहार लगाई.

मैक्सिको का कहना था कि अमरीका ने उसके 54 लोगों को गिऱफ्तार कर, उन्हें मौत की सज़ा सुनाकर वियना संधि का उल्लंघन किया है.

इन लोगों को अपने देश के दूतावास से कानूनी मदद मुहैया नहीं कराई थी.

इस मामले में ये भी सवाल उठा कि क्या ये मसला अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता भी है कि नहीं. अंतरराष्ट्रीय अदालत को ऐसे भी फैसले सुनाने का अधिकार है जो कि किसी देश के कानूनी संप्रभु अधिकारों पर असर डाल सकते हों.

अदालत ने दोनों देशों को अभियुक्तों की नागरिकता सिद्ध करने का आदेश दिया.

आईसीजे ने अपने फैसले में कहा कि अमरीका ने 51 मामलों में वियना संधि का उल्लंघन किया है. साथ ही उसे बचे हुए तीन मामलों के फैसले की समीक्षा करने को कहा.

इसके बाद अमरीका सज़ायाफ्ता लोगों और उनकी मौत की सज़ा की समीक्षा करने को तैयार हो गया.

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