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मैक्रों: 'ये फ्रांस के इतिहास का नया अध्याय है, विभाजित करने वाली ताकतों से लड़ेंगे'
फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव में मध्यमार्गी इमैनुएल मैक्रों ने अपनी प्रतिद्वंद्वी धुर दक्षिणपंथी नेता मरी ल पेन को हराया है.
रुझानों के मुताबिक जीत पक्की होने के बाद ही मैक्रों ने पेरिस के लूव्र म्यूज़ियम के सामने में क़रीब 15 हज़ार समर्थकों को संबोधित किया.
पेरिस में मैक्रों के समर्थकों में ख़ुशी की लहर है. इमैनुएल मैक्रों ने समर्थकों के बीच पहुंचकर कहा,'' ये फ्रांस की जीत है. ये फ्रांस के इतिहास का नया अध्याय है. मैं चाहता हूं कि ये पन्ना उम्मीद और नए विश्वास का हो.''
उन्होंने कहा कि वो देश के लोगों के गु्स्से, चिंता और शंकाओं से वाकिफ़ हैं और राष्ट्रपति के तौर पर पांच साल तक वो फ्रांस को विभाजित करने वाली ताकतों से लड़ते रहेंगे.
उन्होंने फ्रांस की एकता की गारंटी देने और यूरोप की रक्षा और बचाव का वादा भी किया.
'कट्टरपंथ को वोट न देना पड़े'
मैक्रों ने अपने संबोधन में कहा, ''हमारे सामने बहुत विशाल कार्य है और ये कल ही शुरू होने जा रहा है . हमें सार्वजनिक जीवन में नैतिकता वापस लानी होगी, लोकतंत्र की जीवन शक्ति को वापस लाना होगा, हमारी अर्थव्यवस्था में प्राण फूंकने होंगे, यूरोप को पुनर्गठित करने के लिए सबको जगह देनी होगी और फ्रांस के सभी लोगों को सुरक्षा देनी होगी. ''
उन्होंने चरमपंथ और पर्यावरण में बदलाव से भी लड़ने का वादा किया. मैक्रों के साथ उनकी पत्नी ब्रिजिट भी मंच पर पहुंचीं.
मैक्रों ने अपनी प्रतिद्वंद्वी मरी ल पेन को वोट देने वाले मतदाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वो पूरी कोशिश करेंगे कि उनके पास भविष्य में कट्टरपंथ को कभी वोट देने का कोई कारण न रहे.
मरी ल पेन ने हार मानी
वहीं उनकी प्रतिद्वंद्वी मरी ल पेन ने अपनी हार स्वीकार करते हुए कहा, "ये एतिहासिक और बड़ा नतीजा है जिसमें फ्रांस के लोगों ने देशभक्त और रिपब्लिकन गठबंधन को नए राष्ट्रपति के मुख्य विपक्ष के रूप में चुना है. पहले राउन्ड में साफ़ हो गया था कि फ्रांस की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है जब लोगों ने पुरानी पार्टियों को ख़ारिज कर दिया था.
उन्होंने कहा- "दूसरे राउन्ड में राष्ट्रवादियों और वैश्वीकरण के हिमायतियों के बीच मुकाबला था. मैं सभी देशभक्तों से अपील करती हूं कि फ्रांस में निर्णायक लड़ाई का हिस्सा बनें. आने वाले महीनों में फ्रांस को आपकी ज़रूरत है."
फ्रांस में जून महीने में संसदीय चुनाव हैं. मैक्रों के सामने चुनौती कड़ी है क्योंकि उनकी पार्टी के पास एक भी सांसद नहीं है.
उन्हें सरकार चलाने और कई अहम फ़ैसलों के लिए गठबंधन का सहारा लेना होगा.
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