चीन ने उतारा युद्धपोत, जानें कितना है दम

चीन ने अपनी बढ़ती सैन्य ताक़त का प्रदर्शन करते हुए एक नया युद्धपोत उतारा है. लियाउनिन के बाद चीन का यह दूसरा युद्धपोत है.

यह चीन में बना पहला युद्धपोत है. चीन की सरकारी मीडिया ने बताया कि उत्तरी-पूर्वी डालयन के तट पर इस पोत को उतारा गया है.

ख़बरों के मुताबिक 2020 से इसका परिचालन शुरू होगा. दक्षिणी चीन सागर में उत्तर कोरिया और अमरीका में बढ़ते तनाव के बीच चीन ने यह क़दम उठाया है. लियाउनिन चीन का एकमात्र सक्रिय युद्धपोत है.

इसे यूक्रेन से ख़रीदा गया था और चीन ने उसे अपनी ज़रूरत के हिसाब से ढाला था.

कोरियाई प्रायद्वीप में अमरीका ने युद्धपोत और एक पनडुब्बी भेजी है. अमरीका ने यह क़दम उत्तर कोरिया से बढ़ती नाराज़गी के बीच उठाया है. इस बीच चीन ने दोनों पक्षों से शांति बरतने की अपील की है.

चीन का यह युद्धपोत कइयों के लिए परेशानी का सबब होगा. पश्चिम के सैनिकों की चीन के इस युद्धपोत पर नज़र बनी रहेगी. ये मानते हैं कि यह मुकम्मल युद्धपोत नहीं है. पूरी तरह से इसके परिचालन में कुछ साल लग जाएंगे. यह आंशिक रूप से सोवियत युग के डिजाइन में है.

अमरीकी नेवी जिन 10 युद्धपोतों का इस्तेमाल करती है उससे चीन का यह युद्धपोत तकनीकी रूप से कमतर है. लेकिन इस मामले में चीन की एक बड़ी उपलब्धि है. चीन का युद्धपोत कार्यक्रम काफ़ी गोपनीय है. हालांकि इस बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता कि चीन केवल इन दो युद्धपोतों से संतुष्ट होगा.

अमरीका का कहना है कि उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को ख़त्म करने के लिए सारे विकल्प खुले हैं. अमरीका यूएसएस कार्ल विन्सन का भी इस्तेमाल कर रहा है.

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