मलाला को 4 साल की बच्ची क्यों मानती हैं उनकी मां?

मलाला यूसुफज़ई बीते 5 सालों में दुनिया की सबसे प्रसिद्ध युवा महिलाओं में शामिल हो चुकी हैं. नोबेल शांति पुरस्कार के बाद उन्हें सयुंक्त राष्ट्र की ओर से शांति दूत बनाया गया है.

मलाला यूसुफज़ई की सफलता के पीछे उनकी मां तूर पेकाई का ज़बरदस्त योगदान है. मीडिया से अब तक दूर रहने वाली पेकाई ने अपने पहले इंटरव्यू में बीबीसी के साथ अपनी अनसुनी दास्तां साझा की.

'दूसरी बच्चियों जैसी ही है मलाला'

तूर पेकाई ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि मलाला विश्व नेताओं के साथ उठती बैठती है लेकिन घर में वह अब भी छोटी बच्ची जैसी है.

"मलाला न तो ढंग से खाना खाती है और न ही ठीक से पानी पीती है. टाइम पर सोने की जगह वो देर रात तक पढ़ती रहती है. हम उसे फल खाने और नमाज पढ़ने को कहते हैं तो वो अपने भाइयों को कहने लगती है लेकिन खुद नहीं करती."

जब मलाला पर हमला हुआ

मलाला की मां आज भी उन दिनों को याद करते हुए सिहर उठती हैं जब मलाला अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही थीं.

"जब मलाला अस्पताल में थी तब हम उसका ख्याल रखने में व्यस्त थे. फिर वो अपनी किताब लिखने लगी जिसमें हम व्यस्त हो गए, इसलिए मैं कभी मीडिया में नहीं आईं"

ये कहते कहते तूर पेकाई अपने हाथों को कसकर पकड़ लेती हैं और आंसुओं की एक लड़ी उनकी आंखों से लुढ़क जाती है. लेकिन अगले ही पल उनके चेहरे पर मुस्कराहट लौट आती है.

वे कहती हैं कि बीते साल उन्होंने अपनी बेटी के बर्थडे कार्ड पर लिखा कि तुम मेरी चार साल की बेटी हो. क्योंकि अब वह मलाला पर हमले बाद से साल गिनती हैं. ये कुछ ऐसे हैं कि मलाला ने इस हमले के बाद पुनर्जन्म लिया हो.

पराए मुल्क को अपना रही हैं

पाकिस्तान से आने वाली पेकाई को इंग्लैंड आने पर शुरुआत में थोड़ी दिक्कत हुई. लेकिन यहां वे नए दोस्त बना रही हैं और अपनी बेटी की तरह लोगों को शिक्षा दिलाने में मदद करना चाहती हैं.

वे कहती हैं, "मैं लोगों को शिक्षा हासिल करने में मदद करना चाहती हैं, मैं अब ऐसे काम शुरू करना चाहती हूं, अगर ये इंटरव्यू मेरी भाषा में होता तो ज्यादा अच्छा होता. "

45 साल की तूर पेकाई को शुरुआती दौर में येस और नो कहने में भी दिक्कत महसूस हुई. पाकिस्तान में भी उन्होंने पारंपरिक शिक्षा ग्रहण नहीं की थी. लेकिन अब वे बर्मिंघम में अंग्रेजी की क्लास ले रही हैं.

गर्व से फूली नहीं समाती मां

मलाला की मां अपनी बेटी की ऊंची उड़ान पर फूली नहीं समाती हैं. मलाला अब 19 साल की हो चुकी हैं और जल्द ही यूनिवर्सिटी जाकर राजनीति, दर्शनशास्त्र और अर्थशास्त्र की पढ़ाई करने जा रही हैं.

मलाला की मां अपनी बेटी के दूर जाने पर दुखी हैं लेकिन अपनी बेटी को उसकी जिंदगी में नई उड़ान भरते हुए देखकर उनकी आंखें भर आती हैं.

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