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भारत में सक्रिय ईसाई चैरिटी के मुद्दे में कूदे अमरीकी सांसद
- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वाशिंगटन
अमरीकी कांग्रेस के सौ से ज़्यादा सदस्यों ने भारतीय गृह मंत्री को एक पत्र लिखकर अमरीकी ईसाई चैरिटी संस्था कंपैशन इंटरनेशनल को भारत में काम करते रहने देने का अनुरोध किया है.
अमरीका के कोलोराडो राज्य में स्थित ये संस्था भारत के कई गैर-सरकारी संगठनों को बरसों से अनुदान देती रही है. लेकिन इन संस्थाओं पर आरोप लगा है कि वो ग़रीब परिवारों का धर्मांतरण कर रही हैं.
पिछली मई में भारत सरकार ने इस संस्था को "प्रायर परमिशन कैटेगरी" या पूर्व अनुमति श्रेणी में शामिल कर दिया था जिसके तहत किसी भी संस्था को पैसे देने से पहले उन्हें सरकार की अनुमति लेनी होती.
कांग्रेस के सदस्यों ने अपने पत्र में गृह मंत्री राजनाथ सिंह को संबोधित करते हुए लिखा है कि ये संस्था भारत में एक लाख पैंतालीस हज़ार बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और भोजन उबलब्ध करवाती है.
पत्र में लिखा गया है, "हमारा मानना है कि गृह मंत्रालय ने बैंकों को आदेश जारी किया है कि इस संस्था की ओर से भेजी गई रकम को मंत्रालय की अनुमति के बगैर नहीं जारी किया जाए. इस वजह से कंपैशन 15 मार्च के बाद से अपने कार्यक्रम नहीं जारी रख सकेगा और लाखों बच्चों पर इसका असर पड़ेगा."
कांग्रेस के निचले सदन में विदेश मामलों की समिति के प्रमुख एड रॉयस समेत भारतीय मूल के सांसद एमी बेरा ने भी इस पर दस्तखत किए हैं.
इसके पहले अमरीकी विदेश विभाग ने भी भारत सरकार के फ़ैसले पर चिंता व्यक्त की थी और ओबामा प्रशासन के दौरान विदेश मंत्री जॉन केरी ने भी इस संस्था पर लगी शर्तों को हटाने का अनुरोध किया था.
कुछ ही दिनों पहले अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा था कि भारत सरकार ने ये फ़ैसला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दबाव में किया है. लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय ने उन आरोपों का ख़ंडन किया था.
अख़बार ने ये भी लिखा था कि ये संस्था अमरीका में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक प्रतिनिधि से इस मामले पर बातचीत कर रही थी.
लेकिन संघ ने बयान जारी करके कहा कि अमरीका में उनका कोई प्रतिनिधि नहीं है.
अमरीका स्थित कुछ हिंदू संगठनों ने कंपैशन पर लगाई गई शर्तों को सही ठहराते हुए कहा है कि उनका मकसद बेहद स्पष्ट है.
उनकी वेबसाइट पर लिखा हुआ है, "उनकी मंशा बच्चों को ग़रीबी से निकालकर एक ज़िम्मेदार ईसाई बनाने की है."
कंपैशन इंटरनेशनल के सीईओ ने न्ययॉर्क टाइम्स को दिए बयान में ये भी कहा था कि वो इस मामले को ट्रंप प्रशासन के सामने रखेंगे.
ग़ौरतलब है कि ईसाई धर्म का प्रचार प्रसार करने वाली कई संस्थाएं जिन्हें इवैंजेलिकल ग्रुप्स कहा जाता है ने 2016 के चुनाव में ट्रंप का साथ दिया था.