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डोनल्ड ट्रंप को क्यों है चीन की ज़रूरत, 5 वजहें
चुनाव जीतने के बाद से ही अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने चीन की 'वन चाइना' नीति पर सवाल खड़े कर दशकों से चले आ रहे कूटनीतिक प्रयासों को झटका दिया है. इस पर चीन भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया दे चुका है.
लेकिन इन सब के बावजूद ट्रंप को अपने वादों को पूरा करने के लिए चीन की जरूरत पड़ेगी. पढ़िए, क्या हैं वो 5 वजहें जो ट्रंप के लिए चीन की दोस्ती को ज़रूरी बताती हैं.
नौकरियां
व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर ट्रंप ने अगले दशक तक ढाई करोड़ नई नौकरियों का वादा किया है. इस लक्ष्य को पाने में विदेशी निवेश से मदद मिल सकती है.
ट्रंप ने हाल ही में ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा समूह के संस्थापक जैक मा की तारीफ़ की है. जैक मा ने कहा था कि वो अमरीका के छोटे और मझौले स्तर के बिज़नेस के लिए दस लाख नई नौकरियां पैदा कर सकते हैं.
पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के चीन मामलों के सलाहकार पॉल हैनले का भी कहना है कि नौकरी और अर्थव्यवस्था को लेकर जो ट्रंप के लक्ष्य हैं, उन्हें पाने के लिए उन्हें चीन के साथ कैसे काम करना है, इस पर ध्यान देना होगा.
उत्तर कोरिया
ट्रंप के ट्वीट ने यह साफ़ कर दिया है कि वो चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से यह उम्मीद करते हैं कि जिनपिंग अपने पड़ोसी देश उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों को रोकने के लिए और प्रयास करें.
चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और चीन ने किम जोंग उन के शासनकाल में किसी भी और देश की तुलना में सबसे ज्यादा लाभ कमाया है.
उत्तर कोरिया तमाम अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखे हुए है.
चरमपंथ
डोनल्ड ट्रंप ने शपथ ग्रहण करने के बाद अपने पहले भाषण में दुनिया से 'उग्र इस्लामी चरमपंथ' को ख़त्म करने का वादा किया है.
उनका यह वादा चीन के साथ सहयोग के नए दरवाज़े खोलता है. चीन अपने देश में वीग़र मुसलमानों के आंदोलन को कुचलने में लगा हुआ है.
इसके अलावा चीन के पाकिस्तान और ईरान के साथ नज़दीकी रिश्ते हैं.
ईरान
ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते को ट्रंप ने अमरीकी इतिहास का सबसे ख़राब फ़ैसला बताया है.
अगर वो फिर से इस समझौते को लेकर बात करना चाहते हैं या इसे वापस लेना चाहते हैं तो उन्हें चीन की मदद लेनी होगी.
चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है.
बड़ा उपभोक्ता बाज़ार
चीन के साथ बेहतर व्यापारिक समझौता करने के लिए ट्रंप ताइवान के मसले पर सौदेबाजी कर सकते हैं.
ट्रंप प्रशासन इसके बदले क्या चाहता है, इसे कुछ हद तक साफ किया गया है.
ट्रंप प्रशासन ने ताइवान के मुद्दे पर नरम होने के बदले चीन से सरकारी सब्सिडी कम करने को कहा है और अमरीकी कंपनियों के लिए चीनी बाज़ार के दरवाज़े थोड़ा और खोलने को कहा है.
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