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जब 'मामू' बन गए पाकिस्तानी रक्षा मंत्री
- Author, वुसतुल्लाह ख़ान
- पदनाम, पाकिस्तान से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
दुनिया में पहले ही मुसीबतें क्या कम थीं कि अब फर्जी ख़बर की बीमारी भी सोशल मीडिया के ज़रिए हर तरफ़ फैल रही है.
नवंबर के अमरीकी चुनावों में फर्ज़ी समाचारों ने क्या क्या गुल खिलाए, इस पर अब तक बहस हो रही है.
सबसे ख़तरनाक बात ये है कि आज की दुनिया में कोई भी व्यक्ति जिसके पास एक लैपटॉप और इंटरनेट कनेक्शन हो, दुनिया के किसी कोने में बैठकर, अपनी तफ़री के लिए या अपनी तबीयत से मज़बूर हो कर या फिर ज़्यादा से ज़्यादा हिट्स की लालच में कोई भी ऐसा झूठ गढ़ ले, जिससे हज़ारों लाखों लोग ख़तरे में पड़ जाए.
ऐसी वेबसाइट्स पर जितनी हिट्स मिलती हैं, उतने ही इश्तेहार भी मिलते हैं और कोई भी घर बैठे केवल झूठ और सनसनी गढ़ कर हज़ारों डॉलर कमा सकता है.
अगर आप ऐसी वेबसाइट्स से चौंकन्ना नहीं रहेंगे तो आप जितने बड़े धुरंधर हों, उतने ही ज़्यादा शर्मिंदगी में डूबते चले जाएंगे.
इसका ताज़ा उदाहरण पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख़्वाज़ा मोहम्मद आसिफ़ का है. आपको वैसे भी हर विषय पर बोलने और फिर प्रतिक्रिया के मजे लूटने का शौक है.
इस शौक के चलते ही वे पांच दिन पहले जाली ख़बरों के लिए मशहूर एक वेबसाइट एडब्ल्यूडी के हाथों 'मामू' बन गए.
इस वेबसाइट पर ख़बर छपी कि इसराइली रक्षा मंत्री मोसे यालून ने धमकी दी है कि अगर पाकिस्तान ने इस्लामिक स्टेट से लड़ने के लिए शाम में अपने फौजी भेजे तो इसराइल पाकिस्तान को परमाणु हथियारों से नष्ट कर देगा.
ख़्वाज़ा आसिफ़ जिस संवदेनशील पद पर विराजमान हैं, उसका तकाजा है कि देश की रक्षा से पहले अपने कानों और ज़ुबान की रक्षा करें.
मगर यहां पर ऐसी नसीहत देना, सूरज को चिराग दिखाने जैसा है.
ख़्वाज़ा आसिफ़ ने बिना किसी से पूछे, ना आव देखा ना ताव, तुरंत अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिख डाला- इसराइली रक्षा मंत्री ने जो पाकिस्तान को धमकी दी, तो शायद उन्हें याद नहीं रहा कि पाकिस्तान के पास भी परमाणु हथियार है.
क़ाश ख़्वाज़ा आसिफ़ किसी से पूछ लेते कि क्या वाकई पाकिस्तान ने सीरिया में फौज भेजने का फ़ैसला लिया है. अगर किया है तो मुझे किसी ने क्यों नहीं बताया?
क़ाश वे सोच लेते कि अगर वाकई इसराइली रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान को नष्ट करने की धमकी दी है, तो इतनी बड़ी ख़बर विश्व के किसी बड़े अख़बार और चैनल ने क्यों नहीं उठाई है.
और तो और भारतीय मीडिया भी इस पर चुप क्यों है?
और नहीं तो ख़्वाज़ा साब कम से कम विकीपीडिया खोलकर देख लेते कि इसराइल के रक्षामंत्री का नाम मोसे यालून नहीं, एबीगिड्रोल लिबरमैन है. मोसू यालून तो अपने पद से सात महीने पहले ही फ़ारिग हो गए थे.
चलिए ग़लती किसी से भी हो सकती है, भले वो ख़्वाज़ा आसिफ़ ही क्यों ना हों?
मगर अब जब ये मालूम हो चुका है कि ये ख़बर ही ग़लत है और इसराइल के रक्षा मंत्री के आधिकारिक ट्विटर ने उसे झुठला भी दिया है तो ये ट्वीट करने में क्या रूकावट है कि साब माफ़ी चाहता हूं, मुझसे ग़लती हो गई.
पर वो जो कहते हैं मर्दों की एक ज़ुबान होती है, जो कह दिया सो कह दिया, बस.
वैसे जिस मंत्री की इस वक्त देश को सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, वो है ही नहीं. यानी एक फ़ुलटाइम विदेश मंत्री. इसलिए ख़्वाज़ा आसिफ़ समेत हर कोई विदेश मंत्री बना हुआ है, इस तरह तो होता है, इस तरह के कामों में.
वैसे आज से तो मैं ये कहने लायक भी नहीं रहा, ख़्वाज़ा मेरे ख़्वाज़ा दिल में समा जा.
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