नज़रिया: 'ट्रंप को अभी अपनी विदेश नीति भी पता नहीं है'
- Author, प्रोफ़ेसर हर्ष पंत
- पदनाम, विदेशी मामलों के जानकार
अमरीका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन से टेलीफ़ोन पर बात करना बिल्कुल अप्रत्याशित है.
अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर जब 1978 में चीन गए थे, उन्होंने 'वन चाइना' पॉलिसी शुरू की थी. उन्होंने 1979 में इस मुद्दे पर चीन के साथ एक क़रार पर दस्तख़त भी किया था. इसके बाद ताईवान में तैनात अमरीकी राजनयिक वहां से वापस बुला लिए गए थे.

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'वन चाइना' पॉलिसी के तहत अमरीका आधिकारिक तौर पर ताइवान की आज़ादी को स्वीकार नहीं करता है. उस समय से लेकर अब तक किसी अमरीकी राष्ट्रपति ने किसी ताइवानी राष्ट्रपति से बात नहीं की है.
हालांकि ट्रंप की ओर से कहा गया है कि ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने उन्हें राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई देने के लिए फ़ोन किया था और उन्होंने बस वह फ़ोन उठा लिया था. लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था.

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इस पर चीन का नाराज़ होना बिल्कुल स्वाभाविक है. बीज़िंग को इसकी आशंका हो सकती है कि ट्रंप कहीं चीन-अमरीका रिश्तों की बुनियाद ही न बदल दें.
मुझे नहीं लगता कि डोनल्ड ट्रंप एक क़दम आगे बढ़ कर ताइवान को आज़ाद मुल्क के रूप में मंजूर कर लेंगे. लेकिन ट्रंप की विदेश नीति अब तक साफ़ नहीं हुई है. वे ऐसे कई काम कर रहे हैं, जो काफ़ी हट कर है.

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मुझे लगता है कि ख़ुद ट्रंप को यह पता नहीं है कि उनकी विदेश नीति क्या होगी. वे जो कर रहे हैं, अलग अलग लोगों बात कर रहे हैं, उससे लगता है कि वे अभी स्वयं अपनी विदेश नीति तलाश रहे हैं.
सरकार चलाने का ट्रंप का कोई अनुभव नहीं है, इसलिए वे ख़ुद नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं. इसलिए वे इस समय जो कुछ कर रहे हैं, उसे बहुत गंभीरता से लेने की कोई ज़रूरत नहीं है.
(बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी से हुई बातचीत पर आधारित)













