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फ़लस्तीनियों से दोस्ती की उम्मीद रखने वाले इसराइली नेता
इसराइल के पूर्व राष्ट्रपति शिमोन पेरेज़ का बुधवार सुबह 93 साल की आयु में निधन हो गया. इसराइल की स्थापना के बाद से ही शिमोन पेरेज़ वहां के महत्वपूर्ण राजनेताओं में से एक थे.
इसराइल के दो बार प्रधानमंत्री और एक बार राष्ट्रपति बने पेरेज़ ने एक बार कहा था, ''फ़लस्तीनी हमारे निकटमत पड़ोसी हैं, मेरा मानना है कि हो सकता है कि वो हमारे क़रीबी दोस्त बन जाएं.''
पेरेज़ प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति रहने के अलावा सार्वजनिक जीवन में अनेक अहम पदों पर रहे.
दो अगस्त 1923 को पोलैंड में पैदा हुए शिमोन पेरेज़ के पिता लकड़ी के कारोबारी थे.
कृषि यूनिवर्सिटी में पढ़ने के बाद पेरेज़ ने किबुत्ज़ यानी एक कृषि कम्यून में काम किया. वो युवा अवस्था में ही राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हो गए थे. उन्हें 18 साल की उम्र में यहूदी मज़दूर आंदोलन का सचिव चुना गया था.
इसराइल की 1947 में स्थापना के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री बने डेविड बेन ग्यूरियन ने पेरेज़ को इसराइल की सेना के लिए होने वाली गोला-बारूद-हथियार की ख़रीद का ज़िम्मा सौंपा था.
उन्होंने फ़्रांस के साथ मिराज लड़ाकू विमानों का सौदा किया और डिमोना में इसराइल के गुप्त परमाणु कार्यक्रम की नींव रखी.
इसराइली संसद 'क्नेसेट' के लिए वो पहली बार 1959 में चुने गए थे. देश के आधुनिक मज़दूर आंदोलन की अगुआ मापाई पार्टी में पेरेज़ की भूमिका को देखते हुए उन्हें रक्षा उपमंत्री बनाया गया.
सिनाई से ब्रितानी बल न निकलें, इसके लिए दबाब बनाने के संबंध में उन पर गंभीर आरोप लगे. वर्ष 1965 में मिस्र में अमरीकी और ब्रितानी ठिकानों पर बम धामाके की योजना बनाने के बारे में एक जांच हुई जिसमें पेरेज़ को दोषी पाया गया और उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा.
इस अभियान की असली जांच की समीक्षा में पाया गया कि बयानों में समानता नहीं थी. इसके बाद पेरेज़ और ग्यूरियन ने मपाई पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया और अपनी नई पार्टी बनाई.
नई पार्टी को लगातार पांच चुनावों में हार का सामना करना पड़ा. लेकिन गठबंधन सरकारों की वजह से उन्हें हर सरकार में मंत्री पद दिया गया.
पेरेज़ 1992 में इसराइली लेबर पार्टी के प्रमुख का चुनाव हार गए. उन्हें शुरुआती दौर में ही यित्ज़ाक राबिन के हाथों हार का सामना करना पड़ा.
राबिन के विदेश मंत्री के रूप में पेरेज़ ने यासिर अराफ़ात और फ़लस्तीन लिबरेशन आर्गेनाइजेशन के साथ गुप्त रूप से बातचीत शुरू की, जो 1993 में हुए ऑस्लो समझौते का आधार बनी.
इसके बाद फलस्तीनी नेतृत्व ने पहली बार इसराइल के अस्तित्व को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया.
इसके एक साल बाद ही पेरेज़ को राबिन और यासिर अराफ़ात के साथ संयुक्त रूप से नोबल शांति पुरस्कार दिया गया.
राबिन की 1995 में हुई हत्या के बाद पेरेज़ प्रधानमंत्री बने. लेकिन वो इस पद पर एक साल से भी कम समय तक रह पाए. चुनाव में उन्हें लीकुड पार्टी के बेन्यामिन नेतन्याहू के हाथों हार का सामना करना पड़ा.
पेरेज़ ने 2005 में लेबर पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया और कादिमा नाम से नई पार्टी बनाने वाले एरियल शेरोन को समर्थन देने की घोषणा की.
शेरोन के स्ट्रोक से पीड़ित होने के बाद इस बात की चर्चा थी कि पेरेज़ कादिमा पार्टी के नेता बन सकते हैं. लेकिन कादिमा पार्टी में बड़ी संख्या में मौज़ूद लिकुड पार्टी के पूर्व कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया और पेरेज़ पार्टी के नेता नहीं बन पाए.
जून 2007 में पेरेज़ को इसराइल का राष्ट्रपति चुना गया. इसके तत्काल बाद उन्होंने इसराइली संसद 'क्नेसेट' की अपनी सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया. वो इसराइल के इतिहास में सबसे अधिक समय तक संसद सदस्य रहने वाले व्यक्ति थे.
पेरेज़ वेस्ट बैंक में इसाराइली कॉलोनियां बसाने के समर्थक थे. लेकिन बाद में वो राजनीतिक तौर पर शांति और समझौते के पक्षधर बन गए. अक्सर वो फ़लस्तीनी इलाक़े में क्षेत्रीय मांगों पर समझौते की ज़रूरत पर ज़ोर देते थे.