| | चुनावी नतीजे आने के बाद आडवाणी की ये पहली तस्वीर है |
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी लोकसभा में विपक्ष के नेता बने रहेंगे. पार्टी की हार के बाद उन्होंने ये पद छोड़ने की पेशकश की थी. चुनाव नतीजे सामने आने के बाद सोमवार को भाजपा संसदीय दल की बैठक हुई. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने बताया कि उन्होंने और पार्टी के अन्य नेताओं ने आडवाणी से संसदीय दल का नेता बने रहने की अपील की जिसे उन्होंने मान लिया. उन्होंने कहा, "भाजपा को लोकसभा चुनाव में झटका लगा है. भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए हमें ख़ुद को मज़बूत बनाना होगा. इसे देखते हुए आडवाणी ने पद छोड़ने का अपना सुझाव वापस ले लिया."  |  भाजपा को लोकसभा चुनावों में झटका लगा है. भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए हमें ख़ुद को मज़बूत बनाना होगा. इसे देखते हुए आडवाणी ने पद छोड़ने का अपना सुझाव वापस ले लिया  राजनाथ सिंह |
राजनाथ सिंह ने कहा कि पार्टी को अभी आडवाणी के दिशा निर्देशों की ज़रूरत है. संसदीय दल की बैठक के साथ-साथ पार्टी महासचिवों और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की भी बैठक हुई. पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की भी शाम को बैठक होनी थी लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस बैठक में नहीं पहुँच सकने के कारण बैठक स्थगित कर दी गई. 81 वर्षीय आडवाणी ने इससे पहले शनिवार को संसदीय दल की बैठक में पद छोड़ने की पेशकश की थी जिसे पार्टी ने अस्वीकार कर दिया था. पंद्रहवीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में एनडीए को भारी झटका लगा और कांग्रेस पार्टी की अगुआई में यूपीए गठबंधन बहुमत के क़रीब पहुँच गया. भाजपा इन चुनाव में 116 सीटों पर सिमट गई है. ये आँकड़ा वर्ष 2004 के चुनावों में मिली सीटों से भी कम है. |