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सोमवार, 13 अप्रैल, 2009 को 13:07 GMT तक के समाचार
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राहुल ने भी आडवाणी पर निशाना साधा

राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मनमोन सिंह
सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मनमोन सिंह कांग्रेस के मुख्य प्रचारक हैं.
कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कंधार प्रकरण में चरमपंथियों को छोड़ने की जानकारी न होने संबंधी लालकृष्ण आडवाणी के बयान पर कहा है कि या तो तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी को आडवाणी पर भरोसा नहीं था या वह झूठ बोल रहे हैं.

'मज़बूत नेता निर्णायक सरकार' वाले नारे पर आडवाणी को आड़े हाथों लेते हुए राहुल ने कहा, "मैं जानना चाहता हूँ की जब कंधार हुआ और आतंकवादी छोड़े गए तो इस फ़ैसले की जानकारी आडवाणी को क्यों नही हुई?"

उनका कहना था, "इसके दो ही कारण हो सकते है, एक तो ये की गृहमंत्री के तौर पर प्रधानमंत्री वाजपेयी उन पर भरोसा नहीं करते थे या फिर वो झूठ बोल रहे हैं, इसका कोई और कारण नही हो सकता है."

एक तरफ़ जहाँ राहुल गाँधी ने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के आरोप का आक्रामक जवाब दिया तो दूसरी ओर वह गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी पर किए गए प्रश्न को टाल गए.

चुनावी रंग

दक्षिण भारत में कांग्रेस पार्टी को केरल में सबसे ज़्यादा उम्मीदें हैं, कारण चाहे राज्य सरकार की विफलता को मानें या फिर सत्तारूढ़ वाम मोर्चा की मुख्य पार्टी सीपीएम की गुटबाज़ी.

 इसके दो ही कारण हो सकते है, एक तो ये की गृहमंत्री के तौर पर प्रधानमंत्री वाजपेयी उन पर भरोसा नहीं करते थे या फिर वो झूठ बोल रहे हैं, इसका कोई और कारण नही हो सकता है
राहुल गाँधी, महासचिव- युवा कांग्रेस

पहली नज़र में माहौल कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ के पक्ष मे नज़र आता है.

पिछले चुनाव मे राज्य की 20 में से 19 सीटों पर वाममोर्चा या उसके समर्थित उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी, और इस बार कांग्रेस की कोशिश है स्थिति को बिल्कुल उल्टा करने की.

इसके लिए पार्टी ने अपने तीनों दिग्गजों यानि सोनिया गाँधी, मनमोहन सिंह और राहुल गाँधी को चुनाव प्रचार मे झोंक दिया है.

शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह केरल का दौरा करके गए तो सोमवार को कांग्रेस महासचिव राहुल गाँधी का दौरा हुआ.

उन्होने कई जनसभाओं को संबोधित किया और एरनाकुलम में पत्रकारों से भी बात की.

केरल की राजनीतिक फ़िज़ा कहिए या फिर ये कह लीजिए की राहुल गाँधी अब पके हुए राजनीतिज्ञ बन चले हैं, वो आत्मविश्वास से लबालब थे.

सवाल-जवाब

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह की जमकर वकालत की. राहुल गांधी अपने से संबधित व्यक्तिगत सवालों को टाल गये, मसलन प्रियंका गांधी उन्हें प्रधानमंत्री देखना चाहती हैं आदि.

लेकिन जब उनसे उतर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के आरोप पर सवाल किया गया तो उनके तेवर फिर आक्रामक हो गए.

उनका कहना था कि मायावती को लग सकता है कि वो ग़रीबों के घरों मे दिखावे के लिए रात गुज़ारते हैं, लेकिन वो ऐसा करते रहेंगे.

उन्होंने मायावती पर आरोप लगाया की ग़रीबों के लिए उनकी सरकार ने कुछ नहीं किया है. उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की टिप्पणियों पर कोई राय देने से मना किया, पर कहा कि कांग्रेस में युवा नेताओं की कोई कमी नहीं है.

राहुल गाँधी आज प्रेस कांफ्रेंस मे न तो कोई नोट्स लेकर बैठे थे और न किसी सवाल पर अपने दोनों तरफ़ बैठे वरिष्ठ नेताओं व्यलार रवि या ओमन चंडी से कोई सलाह करते दिखाई दिए.

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