यूपी: 'साढ़े तीन' मुख्यमंत्री और 'जुमलेबाज़ी' की चर्चा

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बीच ज़ुबानी जंग तेज़ हो गई है.
सोमवार को बाराबंकी में अवध के पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में अमित शाह ने अखिलेश पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में साढ़े तीन मुख्यमंत्री काम कर रहे हैं. ख़ुद अखिलेश यादव, पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, शिवपाल सिंह यादव और आज़म ख़ां.
यही नहीं, अमित शाह ने राज्य की क़ानून व्यवस्था के मुद्दे पर भी अखिलेश सरकार पर हमला बोला.
अमित शाह ने राज्य सरकार को गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार की प्रतीक बताते हुए लोगों से अपील की क़ानून व्यवस्था के मामले में असफल सरकार को अगले चुनाव में वो बाहर करें और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनवाने में मदद करें.

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वहीं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी पार्टी ने अमित शाह के इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए इसे महज़ 'ज़ुमलेबाज़ी' क़रार दिया है.
मुख्यमंत्री ने लखनऊ में एक कार्यक्रम में अपनी सरकार के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए विपक्षी दलों पर, ख़ासकर भाजपा और केंद्र सरकार पर सहयोग न करने का आरोप लगाया.
वहीं पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने अमित शाह के आरोपों का जवाब एक लिखित वक्तव्य के ज़रिए दिया है. उनका कहना है कि अखिलेश सरकार के चार साल का हिसाब मांगने की बजाय अमित शाह को केंद्र सरकार के दो साल का भी हिसाब मांगना चाहिए.

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राजेंद्र चौधरी ने कहा है, ''चंद घंटों की अपनी यात्रा से कोई उत्तर प्रदेश जैसे बड़े प्रदेश का इतिहास-भूगोल जानने का दावा करे तो वह अमित शाह ही हो सकते हैं. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को समाजवादी सरकार के विकास कार्यों की या तो सही जानकारी नहीं मिली है या फिर वे पूर्वाग्रह से ग्रस्त राजनीति के शिकार हैं. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह दावा है कि केंद्र सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के रास्ते पर चल रही है, जुमलेबाजी का यह एक दूसरा नमूना है.''
अमित शाह के साढ़े तीन मुख्यमंत्री संबंधी बयान पर समाजवादी पार्टी के एक अन्य नेता राजीव दीक्षित ने बीबीसी से कहा कि यह अमित शाह की दृष्टि का दोष है, बाकी राज्य के मुख्यमंत्री तो अखिलेश यादव ही हैं.

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अमित शाह और अखिलेश के बीच बयानबाज़ी और व्यंग्यात्मक वाक युद्ध का यह पहला नमूना नहीं है. पूर्व में इलाहाबाद में भाजपा की रैली से पहले अमित शाह के कथित तौर पर दलित के घर भोजन करने पर भी अखिलेश ने चुटकी ली थी.
अखिलेश यादव ने कहा था कि वो किसी के घर भोजन करने या पानी पीने से पहले उसकी जाति नहीं देखते.
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