मंदिर हादसा: 'पुलिस ने कान-आंख क्यों बंद रखे'

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- Author, समीहा नेत्तिकारा, अखिल रंजन
- पदनाम, बीबीसी मॉनीटरिंग
दक्षिण भारत के राज्य केरल के कोल्लम स्थित पुत्तिंगल देवी मंदिर में हुए हादसे को मंदिर प्रशासन की भयावह लापरवाही माना जा रहा है.
हादसे में 100 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और क़रीब 400 लोग घायल हैं. आतिशबाज़ी की प्रतियोगिता के लिए रखे गए पटाखों में आग लगने से यह हादसा हुआ.
स्थानीय प्रशासन ने इस प्रतियोगिता को मंज़ूरी नहीं दी थी. इसके बावजूद मंदिर परिसर में बड़े पैमाने पर पटाखे रखे हुए थे.
केरल के अख़बारों में इस पर काफ़ी आक्रोश नज़र आ रहा है. संपादकीयों तक में इस घटना के लिए दोषी लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है.
इसके अलावा प्राथमिकता के साथ घायलों के इलाज और पीड़ितों के परिजनों को उचित मुआवज़े की मांग की गई है.
मलयाली दैनिक 'मातृभूमि' का संपादकीय है- आग से खेलना बंद करो. अख़बार ने लिखा है, ''केरल अपनों के खोने पर रो रहा है, जो आंसू कभी नहीं सूखेंगे.''
अख़बार ने आतिशबाज़ी की ऐसी प्रतियोगिताएं बंद करने की मांग की है.
अख़बार ने आगे कहा, ''यह इंसानों की लापरवाही से हुआ हादसा है और कभी नहीं होना चाहिए. जांच महज़ दिखावा नहीं होना चाहिए.''

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अब तक पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ़्तार किया है, जबकि मंदिर अधिकारी कथित तौर पर फ़रार बताए जा रहे हैं.
केरल के मलयाली दैनिक मलयाला मनोरमा ने दोषियों के लिए विस्तृत छानबीन की मांग की है.
अख़बार ने यह भी बताया है, ''बीते 10 सालों में आतिशबाज़ी के हादसों में क़रीब 500 लोगों की जान जा चुकी है और हमने इससे कुछ नहीं सीखा.''
एक अन्य अख़बार 'दीपिका' ने हादसे पर राजनीति न करने की अपील की है. राज्य में अगले महीने विधानसभा चुनाव हैं. दैनिक 'देशाभिमानी' का शीर्षक था- इसे दोहराना नहीं है.
अख़बार ने यह भी लिखा कि हम कैसे इससे बच सकते थे. इस पर बहस करने से पहले हमें काफ़ी कुछ करने की जरूरत है.
अख़बार के मुताबिक़, ''हमें इस हादसे से तबाह हुए परिवारों को भरोसा दिलाने की ज़रूरत है. जिन्होंने अपनों को गंवाया है उन्हें सांत्वना देने की ज़रूरत है. हमें घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने की ज़रूरत है. हमें हर मृतक की पहचान भी करनी है.''
कुछ अख़बारों में यह भी कहा गया कि अगले महीने वाले चुनाव देखते हुए मंदिर के अधिकारियों पर आतिशबाज़ी प्रतियोगिता के लिए राजनीतिक दबाव भी था.

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अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ मंदिर कमेटी को स्थानीय नेताओं का समर्थन हासिल था. हालांकि अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने स्थानीय पुलिस के कार्रवाई न करने के लिए आलोचना की है.
हिंदी दैनिक जनसत्ता ने सवालिया लहज़े में पूछा है कि स्थानीय पुलिस ने अपने कान और आंखें बंद क्यों रखे.
वहीं हिंदी दैनिक अमर उजाला के मुताबिक़ यह हादसा पुरस्कार जीतने के लालच और दो स्थानीय कॉन्ट्रैक्टरों के बीच अपनी ताक़त दिखाने का नतीजा है.
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