टेसू खिले, महका महुआ, तो आया भगोरिया

इमेज स्रोत, PREETI MANN
- Author, प्रीति मान, झाबुआ से
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
जंगल में जब टेसू के फूल खिलने लगते हैं, महुआ महकने लगता है और ताड़ से रस टपकने लगता है तब आता है भगोरिया का उत्सव.
मध्यप्रदेश के निमाड़ अंचल के धार, झाबुआ और अलीराजपुर ज़िलों में होलिका दहन के ठीक एक दिन पहले तक चलने वाला आदिवासियों का यह पर्व आजकल अपने पूरे ख़ुमार पर है.
भगोरिया निमाड़ में बसने वाले भील, भिलाला, पाटलिया और राठिया आदिवासियों का मेला है, जो हर गाँव के हाट में बारी-बारी से लगाया जाता है.

इमेज स्रोत, PREETI MANN
सुनार चाँदी के गहने लेकर हाट में अपनी दुकान सजाते हैं.

इमेज स्रोत, PREETI MANN

इमेज स्रोत, PREETI MANN
भगोरिया उत्सव देखने विदेशी भी आते हैं.
चांदी के ये खूबसूरत गहने जितने भारी होते हैं, उतने ही महंगे भी.

इमेज स्रोत, PREETI MANN
आदिवासी महिलाएं रोज़ सुबह ताड़ी बेचने मंडी जाती हैं. सिर पर मटकी रखने के लिए वे खूबसूरत 'चुमली' का इस्तेमाल करती हैं.

इमेज स्रोत, PREETI MANN
खूबसूरत कढ़ाई किए हुए ये झोले इसी तरह के ख़ास मौकों के लिए बुने जाते हैं.

इमेज स्रोत, PREEI MANN
युवा आदिवासी लड़के भी खूब सज-धज कर मेले में पहुँचते हैं.

इमेज स्रोत, PREETI MANN
आदिवासी स्त्रियां सुबह महुआ के फूल चुनती हैं. इससे शराब बनाई जाती है.

इमेज स्रोत, PREETI MANN
ताड़ के पेड़ से निकलने वाले रस से ताड़ी बनायी जाती है, जिसे आदिवासी पेय के रूप में पसंद करते हैं.

इमेज स्रोत, PREETI MANN
सुर्ख और चटक रंगों में भिलोंडी लहंगे और ओढ़नियां पहने सिर से पाँव तक चांदी के गहनों से सजी-धजी आदिवासी स्त्रियां.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> क्लिक कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












