कोई बताए, इन आंखों की ख़ता क्या थी?

इमेज स्रोत, Smita Sharma

दिल्ली में 16 दिसंबर, 2012 के निर्भया कांड के बाद पूरे भारत में काफ़ी आक्रोश दिखा. सरकार पर भी सख़्त क़ानून का दबाव बढ़ा पर फिर भी देश में बलात्कार के मामले कम नहीं हो रहे हैं.

भारत की फोटो पत्रकार स्मिता शर्मा पिछले कई साल से बलात्कार पीड़िताओं के दुख-दर्द को अपने कैमरे में क़ैद कर रही हैं.

इमेज स्रोत, Smita Sharma

उनकी कोशिश बलात्कार पीड़िताओं की पहचान उजागर करना नहीं है, लिहाजा इन तस्वीरों में आपको पीड़िताओं का चेहरा नज़र नहीं आएगा.

लेकिन आप उनकी आंखें देखकर अंदाज़ा लगा सकते हैं कि उनके भी सपने होंगे और उसे पूरा करने की उम्मीदें भी होंगी.

इमेज स्रोत, Smita Sharma

लेकिन एक अपराध से उनका पूरा जीवन पटरी से उतर जाता है. मुश्किल है कि तमाम जागरूकता के बावजूद और कड़े क़ानून के बाद भी देशभर में बलात्कार के मामले कम नहीं हो रहे हैं.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक़ 2012 में भारत में बलात्कार के 24,923 मामले दर्ज हुए थे.

इमेज स्रोत, Smita Sharma

2013 बलात्कार के मामले बढ़कर 33,707 हो गए और 2014 में बलात्कार के मामलों की संख्या 35,000 से ज़्यादा हो गई.

ये बलात्कार के वैसे मामले हैं, जो पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हुए हैं. ऐसे मामलों की संख्या भी हज़ारों में होगी जहां वो चारदीवारियों में ही दबकर रह जाते हैं.

इमेज स्रोत, Samita Sharma

इन बलात्कार पीड़िताओं के दोषियों को क़ानून भले सज़ा दे दे, पर असली चुनौती तो इनके जीवन को फिर से पटरी पर लाने की है.

स्मिता शर्मा देश भर में घूम-घूमकर स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों और ग़ैरसरकारी संगठनों की मदद से बलात्कार पीड़िताओं की कहानी दर्ज कर रही हैं.

इमेज स्रोत, Smita Sharma

उनकी तस्वीरों से ज़ाहिर होने वाला सबसे दुखद पहलू यह है कि बहुत कम उम्र की लड़कियों के साथ भी बलात्कार के मामले आपको नाउम्मीद कर देते हैं.

फ़ोटोग्राफ़ी के साथ-साथ स्मिता शर्मा यौन हिंसा के प्रति लोगों को जागरूक बनाने और उन्हें शिक्षित करने वाले समूह और बलात्कार पीड़ितों की मदद से साइकिल खरीदने वाले अभियान के लिए फ़ंड जुटाने के अभियान से भी जुड़ी हैं.

इस स्टोरी में शामिल सभी तस्वीरें स्मिता शर्मा की हैं.