पठानकोट हमला: कौन देगा इन 7 सवालों के जवाब

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जब कुछ महीने पहले गुरदासपुर में हमला हुआ था तब बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव ने कई दफ़ा उनका अपडेट वहां के पुलिस अधीक्षक सलविंदर सिंह से लिया था.
पठानकोट हमले से ठीक पहले भारतीय सेना की पोशाक पहने हुए कथित चरमपंथियों ने उन्हीं सलविंदर सिंह की सरकारी एसयूवी छीन ली.
पठानकोट से रिपोर्ट भेज रहे नितिन श्रीवास्तव को ग्राउंड ज़ीरो पर कई सवाल उठते नज़र आ रहे हैं. उनमें से 7 सवाल यूं हैं.
1. इस सवाल का जवाब सभी को चाहिए कि क्या सीमांत ज़िले में देर रात बिना अपनी निजी सुरक्षा को साथ लिए यात्रा करके एसपी सलविंदर सिंह ने बड़ा जोखिम नहीं लिया था?

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2. कथित चरमपंथियों ने सलविंदर सिंह की जिस सरकारी गाड़ी को छीना था, उस पर नीली बत्ती लगी थी. इससे किसी को भी इस बात का अंदाज़ा हो सकता है कि उसमें सवार व्यक्ति या तो आला अधिकारी है या फिर एक वीआईपी. फिर चरमपंथियों ने क्या सोच कर सभी को जाने दिया?
3. भारतीय मीडिया में इस तरह की खबरें हैं कि चरमपंथियों ने अपने घरों में या उस देश में फ़ोन मिलाए जहां से वे आए थे. क्या चरमपंथियों के पास सैटेलाइट फोन थे या उन्होंने भारतीय सिम कार्डों का इस्तेमाल किया?
अगर उन्होंने किसी अपने कथित 'हैंडलरों' या अपने घरों पर बात करने की कोशिश की है तो उससे उनकी नागरिकता का अंदाज़ा लग जाना चाहिए?

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4. भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को ही किसके कहने पर या किसकी सूचना पर ये ट्वीट किया कि 'सभी पांच चरमपंथी मारे गए हैं'?
जबकि रविवार को भारत सरकार को बयान पलटना पड़ा कि तब तक सिर्फ चार चरमपंथी ही मारे गए थे. फिर रविवार शाम इस बात की पुष्टि हुई कि पांचवें चरमपंथी को मार दिया गया है.
5. भारत सरकार लगातार कह रही है कि 'ख़ुफ़िया एजेंसियों की तरफ़ से पहले से मिली सूचना के चलते हमले का असर फीका कर दिया गया'. सवाल ये है कि अगर ख़ुफिया जानकारी पहले ही मिल गई थी, तब हमलावर भारतीय वायु सेना के इतने अहम बेस के भीतर कैसे पहुंचे?

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इसी से जुड़ा दूसरा सवाल ये कि जब एनएसजी कमांडो का एक पूरा दस्ता पठानकोट एयरबेस की सुरक्षा के लिए पहले ही पहुंच चुका था तब जान-माल का इतना नुकसान कैसे हुआ?
6.इस बात पर भी सवाल उठ रहे हैं कि जब चरमपंथियों के बारे में ख़ुफिया सूचना पहले ही पहुंच गई थी तब सरकार ने पठानकोठ में पहले से मौजूद चार सैन्य टुकड़ियों को इस ऑपरेशन में थोड़ी देर से शामिल क्यों किया?
खबरों के मुताबिक सबसे पहले दिल्ली के एमएसजी कमांडो पठानकोट रवाना किए गए. पठानकोट में पहले से मौजूद सैन्य टुकड़ियां भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर और आसपास के इलाकों में चरमपंथी गतिविधियों से लगातार निबटती रही है और जिसका उन्हें अनुभव भी है.
7. भारत से सटे पंजाब बॉर्डर से पिछले कुछ वर्षों में घुसपैठ की घटनाएं बढ़ी हैं. क्या भारत सरकार को नहीं लगता कि भारत प्रशासित कश्मीर में मौजूद एलओसी की तरह ही एक सुरक्षित सीमा की दरकार पंजाब-पाकिस्तान बॉर्डर पर भी है?
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