कीर्ति आज़ाद के भाजपा में दिन पूरे?

- Author, जुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
ऐसा लगता है कि भारतीय जनता पार्टी के "बाग़ी'' सांसद कीर्ति आज़ाद के पार्टी में अब गिने चुने दिन रह गए हैं.
पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के वित्त मंत्री अरुण जेटली के समर्थन में बयान के बाद पार्टी में कीर्ति आज़ाद का भविष्य अंधकार में नज़र आ रहा है.
शाह अब तक ख़ामोश थे क्योंकि वो कीर्ति आज़ाद की '"भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जंग" के समर्थक थे.
संसद में ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि एक सांसद अपनी ही पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और मंत्री से सीधी टक्कर ले और उस पर भ्रष्चार का आरोप लगाए.

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लेकिन सोमवार को कीर्ति आज़ाद ने ऐसा ही किया.
बाद में उन्होंने ट्वीट करके अरुण जेटली को मानहानि का मुक़दमा करने के लिए ललकारा भी.
पिछले एक हफ़्ते से वो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ मिलकर जेटली के ख़िलाफ़ दिल्ली एवं ज़िला क्रिकेट संघ में हुए कथित घोटालों के इलज़ाम लगाए जा रहे हैं.
ज़ाहिर है बीजेपी को इससे परेशानी का सामना करना पड़ा है.
लेकिन अब तक उन पर कोई एक्शन नहीं लिया गया है.

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पार्टी के सूत्रों के अनुसार उनके ख़िलाफ़ इस पूरे मामले के दब जाने के बाद कार्रवाई होगी और मुमकिन है कि उन्हें पार्टी से बाहर निकाला भी जा सकता है जिसकी मांग जेटली पिछले हफ़्ते से कर रहे हैं.
लेकिन क्या बिहार की दरभंगा लोकसभा सीट से पार्टी के टिकट पर पिछले तीन बार से जीत रहे सांसद कीर्ति आज़ाद को पार्टी से निकालना आसान होगा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुहिम चला रहे हैं.
कीर्ति आज़ाद ने अपने तर्क में प्रधानमंत्री की इस मुहिम का हवाला भी दिया है. क्या भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले के ख़िलाफ़ पार्टी कार्रवाई करने का साहस करेगी.
सूत्रों के अनुसार उन्हें निकालने का फ़ैसला ले लिया गया है. उपयुक्त समय का इंतज़ार किया जा रहा है.
अरुण जेटली दरभंगा के सांसद से काफ़ी नाराज़ हैं. सूत्रों के अनुसार वो पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी से भी ख़फ़ा हैं.

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जेटली चाहते थे कि घोटाले के बाहर आने के पहले दिन ये दोनों नेता उनके समर्थन में बयान दें जो नहीं हुआ जिसके कारण वो इन दोनों नेताओं से नाराज़ हो गए.
कहते हैं जो दिखाई देता है वो अहम है लेकिन जो दिखाई नहीं देता वो अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है.
सोमवार को जब जेटली केजरीवाल के ख़िलाफ़ केस करने पटियाला हाउस की अदालत पहुंचे तो उनके साथ स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी भी शामिल थीं.
ये सब को नज़र आया. लेकिन जो साथी नहीं आए उन पर किसी की नज़र नहीं गई.
वित्त मंत्री चाहते थे कि अमित शाह, नितिन गडकरी और ग्रह मंत्री राजनाथ सिंह उनके साथ अदालत में हाज़िर रहें.

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जेटली इस घोटाले के बाहर आने तक, बल्कि कहें सोमवार तक, कैबिनेट के कई अहम साथियों से नाराज़ थे.
अब अमित शाह खुलकर उनके समर्थन में ज़रूर आए हैं लेकिन जेटली शायद पूरी तरह से संतुष्ट न हों क्योंकि शाह ने कीर्ति आज़ाद की निंदा तो दूर अपने बयान में उनका ज़िक्र तक नहीं किया.
बीजेपी चाहती है कि आम आदमी पार्टी के आक्रामक रुख़ से निपटने के लिए पार्टी में एकता बनाए रखना बहुत ज़रूरी है.
अमित शाह का जेटली के समर्थन में खुलकर आना और कीर्ति आज़ाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का लगभग फ़ैसला कर लेना एकता को बनाने की तरफ़ ही एक क़दम है.
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