सर क्रीक मुद्दा कैसे भूल गए मोदी?

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- Author, प्रशांत दयाल
- पदनाम, अहमदाबाद से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
कच्छ में शुरू हुए पुलिस महानिदेशकों की बैठक का एजेंडा है चरमपंथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके मुख्य वक्ता हैं. वे दो दिन यहीं रहेंगे.
यह मौक़ा अहम इसलिए है कि मोदी ने 12 दिसंबर 2012 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक ख़त लिखकर सर क्रीक का मुद्दा उठाया था.
उन्होंने ख़ुद इस मुद्दे पर क्या किया, यह किसी को पता नहीं.
मोदी ने उस चिट्ठी में सात मुद्दे उठाए थे और गुजरात के हितों की रक्षा करने की गुहार की थी.

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उन्होंने लिखा था कि गुजरात के समुद्र तट पर छोटे-बड़े 43 बंदरगाह हैं, जिनकी रखवाली स्थानीय पुलिस या निजी सुरक्षाबल करते हैं.
मोदी ने मांग की थी कि इनकी सुरक्षा के लिए विशेष बल का गठन कर वहां उसे तैनात किया जाए.
मोदी ने यह भी कहा था कि वहां इमीग्रेशन जांच की कोई व्यवस्था नहीं है और यह देशहित में नहीं है. उन्होंने इन जगहों पर मरीन चेकपोस्ट बनाने की मांग की थी.

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तब मोदी ने कहा था कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण वे गुजरात के मुख्यमंत्री नहीं बल्कि आम नागरिक के रूप में यह मुद्दा उठा रहे हैं.
उन्होंने कच्छ के रण से सटी 512 किलोमीटर लंबी पाकिस्तानी सीमा पर बाड़ लगाने की मांग भी की थी. फ़िलहाल सिर्फ़ 213 किलोमीटर की सीमा पर बाड़ है.

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मोदी ने यह मांग भी की थी कि गुजरात के बनासकांठा, पाटन और कच्छ को बॉर्डर रोड एरिया डेवलपमेंट कार्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए.
उन्होंने बंदरगाह पर जेटी बनाने के लिए केंद्र सरकार की सहायता राशि 50 लाख रुपए से बढ़ाकर पांच करोड़ करने को कहा था.
प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने इन मांगों पर क्या किया है, स्थानीय लोग यह सवाल उठा रहे हैं.
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