नीतीश की उम्मीदों को 'साइकिल देगी रफ़्तार'!

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- Author, पंकज प्रियदर्शी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना से
बिहार में चल रहे विधानसभा चुनाव में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को लेकर दोनों प्रमुख गठबंधन दावा कर रहे हैं कि महिलाएँ उनके साथ हैं.
सच्चाई तो आने वाला समय या गहन स्टडी ही बता पाए, लेकिन नीतीश कुमार की बहुचर्चित साइकिल योजना ने सूबे की फ़िज़ा को जो नई उर्जा दी है वो महसूस किया जा सकता है.
लड़कियों में ग़ज़ब का आत्मविश्वास देखने को मिलता है, उनमें उत्साह भी बढ़ा है. वे अपने को लड़कों के समकक्ष समझने लगी हैं.
ग्रुप में साइकिल सवार लड़कियों को देखकर ये आसामी से समझ में आ जाता है कि खुले महौल में सांस लेकर वो कितनी ख़ुश हैं.
पटना के कई गाँव के अलावा सुदूर चंपारण के क्षेत्र में भी मुझे इन स्कूली छात्राओं से मिलने का अनुभव हुआ.

साइकिल के लिए पैसे दिए जाने और उसके दुरुपयोग को लेकर ज़रूर सवाल उठे, लेकिन तारीफ़े ज़्यादा थीं.
ऐसे मामले सामने आए, जिसमें ख़रीदी के पैसे तो लिए गए, लेकिन साइकिल नहीं ख़रीदी गई. कई मामलों में बड़ी बहन की साइकिल अब छोटी बहन चला रही है.
लेकिन स्कूल में लड़कियों की उपस्थिति में बढ़ोत्तरी हुई है.
रक्सौल की रोशनी कहती हैं कि वो स्कूल समय पर पहुँच जाती हैं, इसका पढ़ाई पर भी असर हुआ है.
लड़कियों ये भी कहती हैं कि साइकिल मिलने के बाद वो जब चाहे कहीं जा सकती हैं.

पटना ज़िले के निज़ामपुर गाँव की अंजनी कुमारी कहती हैं, "मुझे क़रीब दो साल पहले साइकिल मिली और तबसे मैं इसे चला रही हूँ. पहले हमें पैदल ही स्कूल जाना पड़ता था. लेकिन अब हालात अलग हैं, हम केवल स्कूल कॉलेज ही नहीं बल्कि अपने निजी काम के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं."
राष्ट्रीय जनता दल की नेता और लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती इसे मतदान में महिलाओं की बढ़ती संख्या से जोड़कर देखती हैं.

मीसा कहती हैं, "नीतीश कुमार ने लड़कियों को पोशाक योजना, साइकिल योजना जैसी जो सुविधाएं मुहैया कराईं है. इसने इन्हें शिक्षा की ओर खींचने का काम किया. इसलिए वो निकलकर महागठबंधन वोट दे रही हैं."
लेकिन विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडे का कहना है, "ये साइकिल योजना बीजेपी के सरकार में रहते हुए आई थी. बालिकाओं को सशक्त बनाने का यह काम बीजेपी की सहयोगी वाली सरकार ने किया था. नीतीश कुमार इसका श्रेय नहीं ले सकते न ये श्रेय जा रहा है."

साइकिल मिलने के बाद कई माता-पिता अपनी लड़कियों में बदलाव महसूस कर रहे हैं और उन्हें ये बदलाव भा भी रहा है. रक्सौल की रोशनी के पिता भुनेश शाह कहते हैं कि अब सब काम समय पर होने लगा है.
उनके मुताबिक़, "जब से साइकिल मिली है, दस दस रुपये किराया नहीं देना पड़ता. कभी खराबी हुई तो दस बीस इसमें लगा देते हैं. जबसे नीतीश सरकार आई है लड़कियों की पढ़ाई बहुत अच्छी हो गई है."

लेकिन लोग शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने की बात भी करते हैं क्योंकि उनके मुताबिक़ महज़ साइकिल से फ़ायदा नहीं होगा.
जनता दल यू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह कहते हैं, "महागठबंधन की सरकार अगर सत्ता में आती है तो शिक्षा हम लोगों की प्राथमिकता में रहेगी."
स्कूलों में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी के बीच उनमें राजनीतिक जागरूकता भी अधिक दिखी.
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