गीता की घर वापसी बनाम औरों की घर वापसी

- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
गीता की घर वापसी भारत और पाकिस्तान की सरकारों के लिए एक पीआर एक्सरसाइज़ है.
लेकिन ये समाज में फूट डालने वालों और नफ़रत फैलाने वालों के मुंह पर एक ज़ोरदार तमाचा भी है.
पाकिस्तान की ईधी ट्रस्ट की तुलना यदि शिवसेना के कारनामों से की जाए तो कई बातें स्पष्ट हो जाती हैं.

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ग़ुलाम अली के कॉन्सर्ट को न होने देना और पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ियों का विरोध करना पार्टी की मज़बूती नहीं, बल्कि इसकी कमज़ोरी को ज़ाहिर करते हैं.
गीता की वापसी सदभावना का प्रतीक है और ये दोनों देशों के बीच बिगड़ते रिश्तों में उम्मीद की एक किरण है.
पाकिस्तान की ईधी फाउंडेशन ने गीता को एक हिन्दू नाम दिया और उसका धर्म परिवर्तन नहीं किया. ऐसा ये अकेला उदाहरण नहीं है.
कई साल पहले मैं पाकिस्तान में एक सिख व्यक्ति से मिला था जिसने मुझे बताया कि उसके माता-पिता को देश के बंटवारे के समय एक मुस्लिम भीड़ ने उसकी आँखों के सामने मार डाला था.

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वो बेहोश हो गया था और उसे जब होश आया तो वो कराची के एक मुस्लिम परिवार के बीच था जिसने उसे बड़ा किया.
उन्होंने उसका धर्म नहीं बदला और जब वो जवान हुआ तो उसकी शादी एक सिख महिला से कर दी.
कुछ साल पहले मैं शिवसेना की नगरी मुंबई में एक मराठी महिला से मिला था जिसने लाहौर के एक मुसलमान से शादी की थी.
उसके पति ने उसका धर्म नहीं बदला, यानी उसका 'लव जिहाद' नहीं किया.
दोनों को एक बेटा भी हुआ लेकिन उसके तुरंत बाद पति का दिल का दौरा पड़ने से देहांत हो गया.
उसके अनुसार पति के परिवार ने उस पर अपशगुनी होने का इलज़ाम लगाया और उसे घर से निकाल दिया.
पाकिस्तान में एक मस्जिद के पेश इमाम और एक पुलिस अफसर ने चंदे के पैसे जुटाए और उसे मुंबई वापस भेजने में उसकी मदद की.

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उस महिला का मानना है कि उसका बेटा हिन्दू-मुस्लिम और भारत-पाकिस्तान के बीच एक कड़ी है.
उसने अपने पति की याद में दोबारा शादी करने से इंकार कर दिया.
दोनों देशों में घर वापसी और निजी त्याग के ऐसी और भी कई उदाहरण होंगे जिनसे ये उम्मीद बनती है कि नफ़रत की दीवार खड़ा करने वाले अंत में नाकाम होते हैं.

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गीता की वापसी कट्टरवादी ताक़तों के लिए एक चुनौती भी है. संघ परिवार मुसलमान और ईसाई समुदायों के बीच घर वापसी यानी हिन्दू धर्म में वापसी का अभियान सालों से चला रहा है.
घर वापसी आरएसएस का सार्वजनिक रूप से घोषित एक अभियान है. पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुसलमान इस अभियान के दायरे में आते हैं.
आरएसएस ने पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोगों की घर वापसी को भी अपनी योजना में शामिल किया है लेकिन वो लम्बे समय की योजना है.
अगर घर वापसी में उनकी सही मायने में दिलचस्पी है तो दोनों देशों के साथ अच्छे संबंध रखना ज़रूरी है.
नफ़रत, अति राष्ट्रवादी और साम्प्रदायिकता को सच्चे दिल से हटाना ज़रूरी है
अब अगर पाकिस्तान के पास ईधी परिवार है तो भारत के पास बजरंगी भाईजान के पवन कुमार चतुर्वेदी !
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