महिलाओं का टिकट काटना महंगा न पड़ जाए

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    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

बिहार विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण में 28 अक्तूबर को मतदान होना है. ये वो चरण है जिसमें महिला विधायकों के टिकट सबसे ज़्यादा कटे हैं.

इस चरण में बीजेपी ने जहां चार वर्तमान महिला विधायकों के टिकट काटे हैं, वहीं जेडीयू ने दो और हिंदुस्तानr आवाम मोर्चा (सेक्यूलर) ने एक महिला विधायक का टिकट काटा है.

इस बात ने महिला कार्यकर्ताओं की बेचैनी बढ़ा दी है. यही वजह है कि महिला कार्यकर्ता अब पार्टी में 33 फ़ीसदी आरक्षण की बात जोर शोर से उठा रही हैं.

36 साल की मनोरमा पासवान नरेंद्र मोदी विचार मंच की महिला सेल की प्रदेश अध्यक्ष है. बीजेपी ने उन्हें महिला वोटरों को बूथ तक लाने की जिम्मेदारी सौंपी है.

वो गर्व से बताती है कि एक हजार महिलाओं को उन्होंने अपने संगठन का सदस्य बनाया है.

लेकिन क्या टिकट देेने में उनकी राय ली जाती है, ये सवाल उन्हें थोड़ा मायूस करता है.

मनोरमा पासवान

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इमेज कैप्शन, मनोरमा पासवान नरेंद्र मोदी विचार मंच की महिला सेल की प्रदेश अध्यक्ष हैं.

वो कहती हैं, “पार्टी सम्मान तो देती है लेकिन भागीदारी नहीं देती. हमने पार्टी से अनुरोध किया है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाए. उम्मीद है कि सरकार बनेगी तो महिलाओं पर कुछ सोचा जाएगा.”

सक्रिय महिला सदस्यों की तादाद के बारे में पूछने पर मनोरमा के बगल में बैठे युवा मंच के संजय गुप्ता बताते हैं, “पांच हज़ार महिला हैं और पुरूष तो लाखों में हैं.”

दीघा विधानसभा क्षेत्र में प्रचार कर रही वंदना राय जेडीयू की कार्यकर्ता हैं. वो रोज़ाना किसी ना किसी उम्मीदवार के रोड शो का हिस्सा बन रही हैं.

जदयू महिला कार्यकर्ता

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भागीदारी के सवाल पर वंदना राय कहती हैं, “टिकट तो कम मिले ही हैं लेकिन हम कहते हैं कि पुराने विधायक अपनी जगह नए लोगों को क्यों नहीं देते. उनको अपना टिकट छोड़ना चाहिए ताकि महिलाएं अपनी हिस्सेदारी ले सकें.”

हालांकि पार्टी में महिलाओं को आरक्षण देने की आवाज़ भी जोर शोर से उठने लगी है.

जेडीयू की अंजलि सिन्हा अपनी पार्टी को लेकर उम्मीदों से भरी हैं.

जदयू महिला कार्यकर्ता

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वो कहती हैं ,“अबकी बार सीट कम मिली तो महिलाओं के टिकट कटे. लेकिन इस बार सरकार बनी तो नीतीश जी हम लोगों को 33 फ़ीसदी आरक्षण दे देंगें.”

वहीं राजद की उर्मिला ठाकुर कहती हैं, “हमारी सरकार बनी तो सक्रिय महिला सदस्यों के एडजेस्टमेंट का आश्वासन मिला है और हमारी पार्टी तो ऐसी है कि उसने एक महिला को ही बिहार का नेतृत्व संभालने की जिम्मेदारी दे दी थी.”

हालांकि इन सबसे अलग वरिष्ठ पत्रकार चंदन कहते हैं, “किसी भी सीट पर पार्टियां सिर्फ जीत का लक्ष्य सामने रखकर काम कर रही हैं. यही वजह है कि अच्छे वोटों से भी जीती ज्यादातर महिला विधायकों को बेटिकट कर दिया गया.”

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