जीतनराम मांझी ने दूसरी सीट से भी पर्चा भरा

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- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने एक और सीट इमामगंज के लिए नामांकन दाखिल किया.
नामांकन दाखिल करने के बाद उन्होंने इमामगंज में एक चुनावी सभा भी की.
इस सुरक्षित सीट पर उनका मुकाबला जनता दल यूनाइटेड के उदय नारायण चौधरी से होगा. बिहार विधानसभा अध्यक्ष चौधरी इमामगंज से ही विधायक हैं.
मखदूमपुर से भी लड़ेंगे मांझी

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इसके पहले मांझी ने 21 सितंबर को मखदुमपुर से नामांकन दाखिल किया था जहां से 2010 में वे विधायक चुने गए थे.
पिछले रविवार को अपने सरकारी आवास पर एक प्रेस कांफ्रेंस में मांझी ने इमामगंज से भी चुनाव लड़ने की ख़्वाहिश ज़ाहिर की थी.
दरअसल मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को एनडीए में सीटों को लेकर हुए समझौते के तहत पहले जो 20 सीटें मिली थीं उनमें इमामगंज की सीट शामिल नहीं थी.
राजनीतिक अदावत

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नामांकन के साथ ही मांझी उदय नारायण चैधरी के साथ अपनी राजनीतिक लड़ाई को चुनावी अखाड़े में ले आए हैं. इस लड़ाई की शुरुआत इस साल फरवरी में हुई थी.
मांझी ने फरवरी में जदयू से बगावत करने के बाद अपने पास बहुमत होने का दावा किया था. ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका महत्त्वपूर्ण हो गई थी.
तब खुद को सदन का नेता बताते हुए मांझी ने अपने एक समर्थक विधायक को जदयू का सचेतक बनाया था.
आरोप

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तब स्पीकर ने न केवल नीतीश कुमार को जेडीयू विधायक दल के नेता के तौर पर मान्यता दी थी बल्कि मांझी के पार्टी सचेतक संबंधी फैसले को भी नहीं माना था.
स्पीकर के ऐसे ही कुछ फैसलों के कारण मांझी ने उन पर पक्षपात करने का आरोप लगाया था. साथ ही तब मांझी के आशंका भी जताई थी कि विधानसभा में उनकी जान को खतरा है.
मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद मांझी ने ऐलान किया था कि वे चौधरी के स्पीकर रहते विधानसभा में नहीं जाएंगे. मांझी ने ऐसा किया भी.
हालांकि माना जाता है मांझी ने ऐसा इस वजह से किया था क्योंकि वे मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद सामान्य विधायक के रूप में सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं होना चाहते थे.
चौधरी भी हैं महादलितों के नेता
मांझी की तरह उदय नारायण चौधरी भी महादलितों के नेता हैं. जदयू के महत्त्वपूर्ण नेता चौधरी एक चुनाव को छोड़ 1990 से लगातार जीत दर्ज करते आ रहे हैं.
2010 के चुनाव में उन्हें राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार रौशन कुमार से कड़ी टक्कर मिली थी. तब वे करीब केवल बारह सौ मतों से ही जीत दर्ज कर पाए थे.
चौधरी वर्तमान पंद्रहवीं विधानसभा के साथ-साथ चौदहवीं विधानसभा के भी अध्यक्ष रहे थे. साथ ही वे लालू प्रसाद यादव के मंत्रिमंडल का भी हिस्सा थे.
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