'प्रधानमंत्री मोदी ने शौचालय साफ़ किए हैं बस'

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भारत का स्टॉक मार्केट अन्य बाज़ारों में आई तेज गिरावट से अनछुआ नहीं रहा है लेकिन दीर्घकालिक निवेशक अब भी ख़ुश हैं.
नरेंद्र मोदी सरकार के आर्थिक मोर्चे पर काम किए जाने को लेकर निवेशकों के आशावादी रवैये के चलते 2014 में बाज़ार 14 प्रतिशत का उछला था.
तब बाज़ार में ख़रीदारी करने वालों में जिम रॉजर्स भी थे जो हाई प्रोफ़ाइल अमरीकी निवेशक हैं.
वो क्वान्टम फ़ंड के सह-संस्थापक भी हैं जो एक हेज फंड है जिसने अपने अच्छे दिनों में दुनिया के कुछ सबसे रईस लोगों के लिए अरबों डॉलर जुटाए हैं.
लेकिन जिम रॉजर्स ने हाल ही में भारत में अपना सारा निवेश बेच दिया है. बीबीसी की शरनजीत लेयल ने उनसे बात की.
पढ़ें बातचीत के अंश

आपने भारत में निवेश बेचने का फ़ैसला क्यों लिया ?
मैंने ख़रीद इसलिए की थी कि मुझे लगा था कि नरेंद्र मोदी आएंगे और अपने वायदों के अनुसार अर्थव्यवस्था के लिए बहुत से अच्छे काम करेंगे.
लेकिन 13-14 महीने बाद कुछ भी नहीं हुआ है. अभी बाज़ार (भारतीय) में तेज़ी है, लेकिन मुझे दुनिया के दूसरे बाज़ारों को देखकर चिंता हो रही थी.
इसलिए मैंने अपना हिस्सा बेच दिया, मुनाफ़ा उठाया और वापस घर चल दिया.
हमें बताया गया था कि उन्होंने एक राज्य को सफलतापूर्वक चलाया है. वह कुछ सालों से प्रचार कर रहे थे कि वह जानते हैं कि क्या करना है.
वह आज़ादी के बाद सबसे बडे बहुमत से जीत गए हैं और अगर वह नहीं कर सकते तो कौन कर सकता है.
उन्हें प्रधानमंत्री बने 14 महीने बीत चुके हैं लेकिन कोई बड़ा परिवर्तन नहीं दिखा है. मैंने इसीलिए शेयर बाज़ार में अपना हिस्सा बेचा डाला.
पीएम ने शौचालय साफ़ किए हैं और बस. लेकिन निवेशक भारत में बहुत सारा पैसा लगाएं इसके लिए इतना काफ़ी नहीं है.
मोदी को क्या सलाह देंगे ?

मैं उन्हें कहता कि अपनी मुद्रा को परिवर्तनीय बनाएं, अपने बाज़ारों को पूरी तरह खोल दें ताकि कोई भी अपने पैसे को अंदर ला सके या बाहर ले जा सके और जो चाहे वह ख़रीद सके.
अगर मैं ऑस्ट्रेलिया में निवेश करना चाहता हूँ तो मैं फ़ोन उठाता हूँ और निवेश हो गया. मैं जर्मनी में फ़ोन करता हूँ और निवेश हो गया. भारत में ऐसा नहीं होता है लेकिन होना चाहिए.
मैं कहता कि कृषि पर लागू मूर्खतापूर्वक नियमों का कुछ करो. भारत कभी दुनिया का एक महान कृषक देश हुआ करता था. आपके पास सही मौसम है, लोग हैं, मज़दूर हैं, ज़मीन है लेकिन केंद्र में बैठी सरकार इस सबको बर्बाद कर रही है.
अगर आप प्रकृति को अपनी चाल चलने दें और किसानों को अपने मन की करने दें तो भारत एक बार फिर महान कृषक देश हो सकता है.
निवेशकों में झिझक क्यों है?

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अफ़सरशाही. मैंने हर जगह अफ़सरशही का ही प्रभाव देखा है. आपको बता दूं कि दुनिया की सबसे ख़राब और सबसे अच्छी अफ़सरशाही भारत में ही है. यही भारत को रोक रही है.
दूसरी चीज़ है भारत का कर्ज. भारत में जीडीपी के अनुपात में 19 फ़ीसदी कर्ज़ है.
जब आपका कर्ज़ बहुत ज़्यादा होता है तो आप तेज़ गति से विकास नहीं कर सकते क्योंकि आप हमेशा पुराना कर्ज़ ही चुका रहे होते हो.
टेक में रुचि क्यों नहीं ?
अभी पूरी दुनिया में टोक सेक्टर एक बुलबुला है.
बहुत सारे लड़के और लड़कियां अपने गैराजों में ये-वो या जो भी वह करते हैं और कई अरब डॉलर के मालिक हैं.

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पहली बात तो यह कि मुझे तकनीक समझ नहीं आती है और दूसरी बात यह कि मैं जानता हूँ कि यह एक बुलबुला है जैसा कि 1990 में अमरीका का टेक बुलबुला था.
इनका आश्चर्यजनक मूल्यांकन किया जा रहा है. उन्हें लगता है कि वह अमीर हैं और वह हैं भी अभी लेकिन जब यह बुलबुला फूट जाएगा तब भी क्या वह अमीर रहेंगे- मुझे इस पर संदेह है.
मैं बुलबुलों की ख़रीद नहीं करता और मैं ऐसी चीज़ भी नहीं ख़रीदता जो मुझे समझ नहीं आती.
भारत में कहां लगाएंगे पैसा?
यह निर्भर करता है कि कौन से स्टॉक नीचे जाते हैं. मैं सस्ती-सस्ती चीज़ें ख़रीदना पसंद करता हूँ.
भारतीय पर्यटन का बहुत शानदार भविष्य है.

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भारतीय कृषि का भी बहुत शानदार भविष्य हो सकता था अगर मोदी इसे मुक्त करने के लिए बहुत सारे काम करते.
भारतीय वित्त भी अच्छा प्रदर्शन कर सकता था अगर इसे नियंत्रण मुक्त किया जाता है तो.
और यह अगर बहुत बड़ा शब्द है और बात यह है कि यह अगर अभी तक हुआ नहीं है.
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