जब क़ब्रिस्तान में सोया एक आईएएस अधिकारी

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तमिलनाडु के मदुरई ज़िले की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई.
तस्वीर में एक लंबे तगड़े सजीले शख़्स को एक क़ब्रिस्तान में खाट पर सोया हुआ दिखाया गया है.
यह तस्वीर तमिलनाडु काडर के आईएएस अफ़सर यू सहायम की है.
मेलुर गांव के क़ब्रिस्तान में सहायम खाट पर ही सो गए. वे नहीं चाहते थे कि 1990 में वहां दफ़नाई गई लाश से कोई किसी तरह की छेड़छाड़ करे.
पहरेदारी की आएएस अफ़सर ने

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उन्हें किसी ने गोपनीय जानकारी दी थी कि मानसिक रूप से विक्षिप्त एक शख़्स को मार कर यहीं दफ़ना दिया गया था.
गांव के लोगों ने कहा कि यहां मिले चार कंकाल उनके रिश्तेदारों के हैं. इनके नमूने डीएनए टेस्ट के लिए चेन्नई भेजा गया.
पर मदुरई और आस-पास के लोगों को सहायम की वह तस्वीर देख कर कोई अचरज नहीं हुआ. वे जानते थे कि ऐसा करना इस अफ़सर के लिए तो निहायत ही आम बात है.
उन्हें ग़ैर क़ानूनी खनन की जांच करने के लिए बनी समिति का प्रमुख बनाया गया. उन्होंने गांव वालों को आश्वस्त किया कि वे किसी सूरत में उनकी हिफ़ाज़त करेंगे.
वे सबूत नष्ट नहीं होने देंगे, इसलिए वे ख़ुद वहां जा कर पहरेदारी करने लगे.
डीएनए टेस्ट

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उन्होंने चारों कंकालों का मुआयना ख़ुद किया और उनके नमूने जांच के लिए भेजे. जांच से पता चलेगा कि ये कंकाल गांव के ही किसी परिवार के हैं या किसी और के.
साल 2011 में मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई क़ुरेशी ने ख़ुद सहायम को चुना और मदुरई और आस-पास के इलाक़ों में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने की ज़िम्मेदारी सौंपी.
सहायम ने काफ़ी कड़ाई से चुनाव आयोग के दिशा निर्देशों को पूरी तरह लागू किया और चुनाव में किसी तरह की कोई धांधली नहीं होने दी.
बाद में डीएमके नेता अलागिरी ने पुलिस ज़्यादती की शिकायत की. पर उस समय वे स्वयं केंद्रीय मंत्री थे और उनके पिता राज्य के मुख्यमंत्री.
करुणानिधि ने की शिकायत

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करुणानिधि ने ख़ुद मुख्य चुनाव आयुक्त से शिकायत की थी कि उस समय "तमिलनाडु में आपातकाल जैसे हालात कर दिए गए थे."
सहायम ने तिरुमंगलम फ़ार्मूले को पूरी तरह नाकाम कर दिया. इसके तहत कथित तौर पर वोटरों को वोट के हिसाब से पैसे दिए जाते थे. इसकी कोई शिकायत नहीं हो पाती थी.
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त क़ुरैशी ने चुनाव मे पैसे के इस खेल को रोकने के लिए सहायम की जम कर तारीफ़ की थी.
20 साल में 20 तबादले

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चुनाव के बाद सहायम खनन से जुड़ी तमाम तरह की ग़ैर-क़ानूनी गतविधियों को रोकने में जुट गए.
पर सरकार ने उन्हें जल्द ही बुनकरों के सहकारी संगठन को-ऑपटेक्स का महानिदेशक बना कर खनन विभाग से बाहर कर दिया. सहायम का 20 साल में 20 बार तबादला हो चुका है.
सहायम ने ग़ैर-क़ानूनी खनन से जुड़े आंकड़े इकट्ठा किए. उन्होंने घपले के कारण सरकार को हुए 16,000 करोड़ रुपए का पता लगाया और उसकी पूरा वैज्ञानिक सबूत इकट्ठा किया.
(स्थानीय पत्रकार केवी लक्ष्मण से बातचीत पर आधारित)
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