सरकारी जश्न से दूर 65 में लड़ने वाले फ़ौजी

    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

1965 में पाकिस्तान के साथ हुई जंग में इनमे से बहुत सारे हैं जिन्होंने अपनी जान की बाज़ी लगा दी थी.

जंग के दौरान भारत को कई स्थानों पर एक के बाद कामयाबी मिलती चली गई और देश के फ़ौजियों का मनोबल अपने पूरे शबाब पर जा पहुंचा.

शुक्रवार को जब भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दिल्ली के इंडिया गेट स्थित 1965 की जंग में जीत के जश्न में शामिल हो रहे थे वहीं कुछ ही दूर पर इस जंग के हीरो यानी पूर्व सैनिक अपने आंदोलन के 75 वें दिन भी मायूसी में डूबे नज़र आए.

एक पद एक पेंशन की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में कई ऐसे पूर्व जनरल, करनल और सैनिक हैं जिन्होंने 1965 की जंग में पाकिस्तानी सेना का डटकर सामना किया था.

बहादुरी की मिसालें

इनमे से कई ऐसे भी हैं जिनकी बहादुरी की मिसालें नई पीढ़ी को दी जाती रही हैं.

मगर आज उन्हें लगता है कि उनके बहादुरी के तमगे सरकार के लिए बेमानी हो गए हैं.

सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल विजय लाल ने जंतर मंतर पर हिस्सा लेना बेहतर समझा
इमेज कैप्शन, सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल विजय लाल ने जंतर मंतर पर हिस्सा लेना बेहतर समझा

यही वजह है कि 1965 की लड़ाई में अपना लोहा मनवाने वाले इन लोगों में से कई ऐसे हैं जिन्होंने सरकार के न्योते को ठुकरा दिया और इस लड़ाई की जीत के पचास साल पर आयोजित सरकारी कार्यक्रम में हिस्सा लेने से इंकार कर दिया.

इन्ही में से एक हैं सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल विजय लाल भी हैं, जिन्होंने इण्डिया गेट जाने के बजाय जंतर मंतर पर अपने पुराने साथियों के आंदोलन में शामिल हुए.

स्वाभिमान का सवाल

बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "मुझे न्यौता मिला तो था मगर मैं नहीं समझता कि मुझे वहां जाना चाहिए था. एक फ़ौजी के नाते वहां जाना मेरे आत्म स्वाभिमान के ख़िलाफ़ है."

विजय लाल की तरह ही 1965 की जंग में शामिल कर्नल किरीट जोशी ने भी सरकारी जश्न में शामिल होने की बजाय आंदोलन में ही हिस्सा लेना बेहतर समझा.

वो कहते हैं, "हम यहाँ जश मना रहे हैं. पुराने साथी भी यहाँ हैं. हमने साथ मिलकर जान लड़ी और जीते भी. आज हम यहाँ सरकारी आयोजन से दूर आपस में जश्न मना रहे हैं."

सूबेदार परगट सिंह पेंशन बढ़ौतरी की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं
इमेज कैप्शन, सूबेदार परगट सिंह पेंशन बढ़ौतरी की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं

जंतर-मंतर पर ही सूबेदार परगट सिंह भी हैं जो पिछले दो दिनों से अपनी पेंशन बढ़ौतरी की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं.

आज उन्हें अपने ऊपर और अपनी रेजिमेंट के उन साथियों पर गर्व तो है कि उन्होंने अपनी जान की परवाह किये बिना पाकिस्तानी फ़ौज का सामना किया था.

लेकिन अफ़सोस भी है कि जिन फ़ौजियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना देश की रक्षा की आज उनकी मांगों को लेकर कोई भी गंभीर नहीं है.

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