डीएनए वाले चुनावी पैंतरे से नीतीश को फ़ायदा ?

इमेज स्रोत, Reuters shalendra kumar
- Author, महेंद्र सुमन
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
जॉर्ज बर्नाड शॉ ने चुनावों को 'कीचड़ स्नान' कहा है. दुनिया भर के चुनावों में खूब कीचड़ स्नान होता है और विरोधियों पर तीखे आक्रमण-प्रत्याक्रमण होते रहते हैं.
बिहार में मुजफ्फरपुर की अपनी पहली चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 'डीएनए' को निशाना बनाया.
इसका राजनीतिक संदर्भ जो भी हो, 'डीएनए' शब्द का चयन बिहार में आमतौर से पसंद नहीं किया गया.
ठीक उसी तरह जैसे नीतीश का 2010 में भाजपा के शीर्ष नेताओं को दी जाने वाले रात्रि भोज को रद्द करना पसंद नहीं किया गया था.
नरेंद्र मोदी ने चुनावी अभियान में आक्रमणों की पहल कर दी है और यह बिल्कुल प्रत्याशित है.
विस्तार से पढ़ें

इमेज स्रोत, AFP
शब्द चयन में ग़लती का अहसास भाजपा को भी है, इसीलिए बिहार एनडीए के शीर्ष नेताओं का संयुक्त बयान जारी कर कहा गया कि, "मोदी जी का अभिप्राय नीतीश के राजनीतिक 'डीएनए' से था."
दिल्ली चुनावों में आम आदमी पार्टी ने सकारात्मक चुनावी प्रचार करते हुए केजरीवाल पर मोदी के व्यक्तिगत हमलों का बखूबी इस्तेमाल किया.
अभी ‘आप‘ से नजदीकियां बनाकर चल रहे नीतीश दिल्ली चुनावों से काफी प्रभावित हैं.
बिहार में उन्होंने व्यक्ति-केंद्रित चुनावी प्रचार अभियान चला रखा है जिसे उनके राजनीतिक हमसफर और साझीदार भी शायद ही पचा पा रहे हैं.
ऐसी स्थिति में नरेंद्र मोदी का यह व्यक्तिगत हमला उनके व्यक्ति-केंद्रित अभियान को और धारदार बनाएगा और लगे हाथ उनके अपने खेमे के विरोधियों को भी साथ खींच लाएगा.
नीतीश यही मानकर चल रहे हैं और पलटवार के उनके सारे कार्यक्रम इसी सोच से प्रेरित हैं.
'डीएनए' वाले बयान पर शुरुआती प्रतिक्रिया में लालू ज्यादा आक्रामक और नीतीश थोड़ा रक्षात्मक मुद्रा में दिख रहे थे.
'डीएनए' राजनीति

इमेज स्रोत, Shailendra Kumar
लेकिन अब नीतीश इसे लम्बा खींचकर बिहारी अस्मिता/स्वाभिमान का एक राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं.
पहले नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा और अब 'डीएनए' शब्द वापसी को लेकर उन्होंने एक राजनीतिक अभियान का ऐलान किया है.
इसके तहत पूरे बिहार में धरना, 'डीएनए' जांच के लिए 50 लाख बिहारियों के नाखून तथा बाल के सैम्पल एकत्र करना, एक करोड़ हस्ताक्षर और 29 अगस्त को पटना के गांधी मैदान में जदयू-राजद की संयुक्त स्वाभिमान रैली शामिल है.
चलिए, बिहारी अस्मिता पर भी थोड़ी चर्चा कर लें.
आज़ादी के बाद बिहार में नीतीश कुमार ही अकेले ऐसा राजनेता हुए हैं जिन्होंने बिहारी उप राष्ट्रवाद को एक एजेंडा के बतौर राजनीति के केंद्र में लाने की कोशिश की है.
अपने कार्यकाल में ‘ग्रोथ मिरॉकल‘, ‘रिसर्जेन्ट बिहार‘ जैसे माकूल माहौल के बीच पूरे राज्य और देश-विदेश मे बिहार दिवस तथा इसी तर्ज पर कई आयोजनों की शुरुआत कर उन्होंने बिहारी गर्व को तराशने का भरसक प्रयास किया.
बिहारी अस्मिता

इमेज स्रोत, manish shandilya
खासतौर से, राज्य के विशेष दर्जे के लिए राजनीतिक अभियान में बिहारी अस्मिता पर गोलबंदी तो ऐतिहासिक जरूरत थी.
मगर विडम्बना कहिए कि बिहार की जनता और यहां के राजनीतिक वर्ग को इस अभियान में एकजुट करने में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली.
आज की तारीख में यह नीतीश और कुछ बिहारी अकादिमकों का ‘पेट प्रोजेक्ट‘ बनकर रह गया है जिसकी बस प्रवासी बिहारियों में थोड़ी-बहुत अपील है.
कई विश्लेषक यह मानते हैं कि बिहारी अस्मिता जैसी कोई चीज नहीं है.
बिहार में यह जातीय व जनपदीय अस्मिताओं (भोजपुरी, मैथिली आदि) में बंटा है और बिहार के बाहर व्यापक हिंदी अस्मिता में यह खो जाती है.
मतलब यह तमिल, बंगाली, पंजाबी आदि प्रादेशिक अस्मिताओं की तरह ऐतिहासिक रूप से सुदृढ़ आधारों पर टिकी नहीं है.
नरेंद्र मोदी ने बंगाल या तमिलनाडु के 'डीएनए' पर ऐसा कुछ बोला होता तो शायद ज़्यादा बवाल मचता.
आरोप प्रत्यारोप

इमेज स्रोत, BBC World Service
कभी तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा ‘कलकत्ता इज डाइंग सिटी‘ कहने पर पश्चिम बंगाल का पूरा वाम और दक्षिण धड़ा एकजुट हो गया था.
बेहतर होगा कि नीतीश कुमार 'डीएनए' को अपना निजी राजनीतिक एजेंडा बनाने से बचें.
मोदी ने गया रैली में नए शब्दों के साथ कुछ और हमले किए हैं, आगे की रैलियों में यह और तेज होगा.
नीतीश कीचड़ स्नान का मजा लें और पूरे जोर से राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप करें.
बिहारवासी अपनी राजनीतिक चेतना के लिए मशहूर हैं और यही चेतना उनके स्वाभिमान की असली ताक़त है न कि 'डीएनए' के इर्द-गिर्द बुनी गई कोई आरोपित पहचान.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>














