'स्कूल में पुलिस रहेगी तो बच्चे कहां पढ़ेंगे'

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- Author, संजीव चंदन
- पदनाम, नागपुर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
पिछले दिनों नागपुर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को लेकर हंगामा खड़ा हो गया.
दरअसल नागपुर महानगर पालिका ने शहर के ऊंटखाना इलाके में स्थित डॉ. बाबासाहब आम्बेडकर प्राथमिक विद्यालय की इमारत को भागवत की ज़ेड प्लस सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ़ (सेंट्रल इंडस्ट्रियल सेक्युरिटी फ़ोर्स) के जवानों को देने का फैसला किया है.
हाल ही में नागपुर महानगर पालिका ने अग्रिम कब्जा (एडवांस पजेशन) के लिए सीआईएसएफ़ के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल को पत्र दिया.
पत्र के मुताबिक स्कूल की इमारत 4, 72, 915 रुपए के सालाना किराए पर पांच साल के लिए सीआईएसएफ़ को देने का निर्णय लिया गया है.
नागपुर महानगर पालिका पर बीजेपी का शासन है.
हंगामा बरपा

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दलित संगठनों को जैसे ही पता चला कि ऊंटखाना स्कूल की इमारत को भागवत की सुरक्षा के लिए दिया जा रहा है, तो उन्होंने इसका तीखा विरोध किया, शहर में जगह–जगह धरने प्रदर्शन किए जाने लगे.
अभिभावकों के साथ कई सामाजिक संगठनों ने पिछले 20 जुलाई को महानगर पालिका की सभा में इसके लिए प्रस्ताव पारित होने की आशंका को देखते हुए नागपुर के टाउन हाल के बाहर प्रदर्शन किया.
प्रदर्शन करने वालों में पूर्व नगर सेवक मिलिंद गाणार, निगम पार्षद योगेश तिवारी और सुजाता कोबाड़े शामिल थे.
मिलिंद कहते हैं, "बाबा साहब आम्बेडकर के नाम के ही स्कूल को इस काम के लिए चुने जाने के पीछे भगवा संस्थाओं की क्या मंशा है ? वे संघ प्रमुख के घर के करीब ही हेडगेवार भवन में सीआईएसएफ़ के लोगों को क्यों नहीं ठहराते!"
पार्षद तिवारी कहते हैं, "यहाँ दलितों और ग़रीबों के बच्चे पढ़ते हैं, वे कहाँ जाएंगे?"
मेरे बच्चे कहाँ पढेंगे?

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स्कूल की अध्यापिका कल्पना निकम बताती हैं, "दो सप्ताह पहले कुछ लोग आए थे, स्कूल का मुआयना कर रहे थे. उन्होंने कहा कि जल्द ही भवन खाली करने का आदेश आपको मिल जाएगा."
भारी मन से निकम पूछती हैं, "लेकिन हमारे बच्चे कहाँ जाएंगे!"
कल्पना निकम अपने ख़र्चे पर कई दलित बच्चों को रिक्शा से स्कूल लाती ले जाती हैं. कुछ बच्चों को उनका बेटा अपनी साइकिल पर लेकर आता है.
स्कूल के छात्र दिव्यांग गायकवाड की माँ मनीषा गायकवाड कहती हैं, "दो दिन से मेरा बेटा स्कूल नहीं गया है, सुना है कि नागपुर में फांसी दी जा रही है. इसके स्कूल में पुलिस वाले रहेंगे तो मेरा बच्चा पढ़ेगा कहाँ?"
मजदूर नेता जम्मू आनंद बताते हैं कि 2006 में आरएसएस के नागपुर स्थित मुख्यालय पर हमले के बाद उसकी सुरक्षा के लिए ‘भाऊ दफ्तरी स्कूल’ को सुरक्षाकर्मियों के आवास के लिए दे दिया गया, उसके बच्चे दर–ब-दर हो गए थे. एक बार फिर इतिहास दोहराया जा रहा है."
प्रस्ताव स्थगित

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विवाद को देखते हुए 20 जुलाई को महानगर पालिका की सभा में सत्तापक्ष ने स्कूल को सीआईएसएफ़ को देने का प्रस्ताव पेश नहीं किया.
नागपुर के महापौर प्रवीण दटके ने बीबीसी से कहा, "यह महानगर पालिका के हाउस का मामला है, इसलिए इस पर प्रेस में कुछ नहीं बोलूंगा."
वहीं कांग्रेस के निगम पार्षद योगेश तिवारी कहते हैं, "सत्ता पक्ष प्रस्ताव दुबारा लाने की कोशिश करेगा. क्योंकि अभी यह प्रस्ताव स्थगित हुआ है और सीआईएसएफ़ को जारी एडवांस पजेशन का पत्र रद्द नहीं हुआ है."
स्कूल को सुरक्षाकर्मियों को दिए जाने के ख़िलाफ़ लड़ रहे कम्युनिस्ट नेता एके घोष कहते हैं, "यह सब नगर पालिका के स्कूलों के निजीकरण का भी हिस्सा है, नागपुर महानगर पालिका ने अपने 200 से अधिक स्कूलों का निजीकरण करने का प्रस्ताव पहले ही पास कर रखा है."
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