भाजपा ने जम्मू के लोगों को धोखा दिया है ?

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- Author, बीनू जोशी
- पदनाम, जम्मू से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में पहली बार सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी से जम्मू के लोगों का महज सात महीनों में मोहभंग होता दिख रहा है.
जम्मू के कई लोगों को लग रहा है कि पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ गठबंधन सरकार चला रही भाजपा उनकी अनदेखी कर रही है.
जम्मू के बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अभिनव शर्मा ने बीबीसी से कहा, "भाजपा और पीडीपी गठबंधन सरकार केवल कश्मीर घाटी के हितों को ध्यान में रख कर काम कर रही है. भाजपा ने जम्मू के लोगों को बहुत बड़ा धोखा दिया है."
दिसंबर 2014 में हुए विधान सभा चुनाव में भाजपा को पहली बार जम्मू-कश्मीर की 87 में से 25 सीटों पर जीत मिली. पार्टी को ये सभी सीटें हिन्दु-बहुल जम्मू क्षेत्र में मिलीं जहाँ विधान सभा की कुल 37 विधान सभा सीटें हैं.
चुनावी वादा

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चुनाव के समय यहाँ नरेंद्र मोदी की लहर भी थी और लोग कांग्रेस-नेशनल कांफ्रेंस गठबंधन सरकार से नाराज़ भी थे.
चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने यहाँ की रैलियों में जम्मू के साथ भेदभाव ख़त्म करने और चौतरफा विकास की बात कही थी.
अभिनव शर्मा एम्स (आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज) कोऑर्डिनेशन कमिटी के प्रमुख भी हैं. यह कमिटी इन दिनों एम्स को जम्मू से कश्मीर घाटी ले जाने के फ़ैसले का विरोध कर रही है.
इस समिति को छत्तीस से अधिक सामाजिक, व्यापरिक और अन्य संस्थानों के अलावा विपक्षी दल कांग्रेस और पैंथर्स पार्टी का भी समर्थन मिल रहा है.
आंदोलन करने वालों का कहना है, " एम्स जम्मू के लिए मंज़ूर हुआ था. लेकिन एजेंडा फॉर अलायन्स के तहत इसे कश्मीर घाटी को दे दिया गया. यह भाजपा की कमज़ोरी के कारण हुआ."
'एजेंडा फॉर अलायन्स' पीडीपी और भाजपा की गठबंधन सरकार चलाने के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम है, जिसे दोनों दलों के शीर्ष नेताओं ने मिलजुल कर बनाया था.
'कश्मीर को सब कुछ मिल रहा है'

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कोऑर्डिनेशन कमिटी अप्रैल से ही एम्स को जम्मू में ही रखने के लिए आंदोलन कर रही है.
कमिटी ने 31 जुलाई को पूरे जम्मू क्षेत्र में 72 घंटे के बंद की अपील की, जिसका काफ़ी असर दिखा.
अभिनव शर्मा कहते हैं, " भाजपा ने केवल एम्स ही नहीं बल्कि कई दूसरे मुद्दों पर भी जम्मू के लोगों के साथ धोखा किया है. वह एजेंडा फॉर अलायन्स पर राजी हो गई, जिससे कश्मीर घाटी को सब कुछ मिल रहा है."
शर्मा कहते हैं कि भाजपा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन पर भी चुप्पी साधे हुए है. जम्मू के लोग कई सालों से इसकी माँग कर रहे हैं.
जम्मू-कश्मीर में संसद में पारित प्रस्ताव के मुताबिक़, साल 2025 से पहले परिसीमन नहीं हो सकता. पर राज्य विधान सभा संशोधन लाकर यह काम पहले भी कर सकती है.
परिसीमन का विरोध

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कश्मीर घाटी में ज़्यादा प्रभाव रखने वाले दल नए परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, क्यूंकि जनसंख्या की वज़ह से जम्मू में सीटें बढ़ जाएँगी.
शर्मा का आरोप है कि भाजपा मंत्रियों के पास बिजली, पानी, शहरी विकास और उद्योग विभाग हैं, लेकिन ये विभाग भी जम्मू की अनदेखी कर रहे हैं.
जम्मू के चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष राकेश गुप्ता भी मानते हैं कि भाजपा ने जम्मू को निराश किया है.
गुप्ता कहते हैं, "भाजपा को शासन करना नहीं आ रहा. जम्मू के लोगों ने इन्हें बहुत उम्मीदों के साथ चुना था, पर भाजपा के विधायक अब आम जनता से दूरी बना रहे हैं."
कई मुद्दों पर नाकाम

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राकेश गुप्ता कहते हैं , "एम्स ही नहीं बल्कि कई अन्य मसलों जैसे तवी नदी पर कृत्रिम झील, बिजली, सड़क, पानी और सुशासन देने में भाजपा नाकाम रही है."
मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने मई में कहा था की जम्मू में तवी नदी पर कृत्रिम झील नहीं बन सकती.
अभिनव शर्मा कहते हैं कि एजेंडा फॉर अलायन्स में जम्मू क्षेत्र को तीन भागों, चेनाब घाटी (डोडा, किश्तवाड़ और रामबाण जिला ), पीरपंचाल (राजौरी और पूंछ) और जम्मू मैदानी इलाक़े में बांटने की बात कही गई है. इनमें चेनाब घाटी और पीरपंचाल मुस्लिम-बहुल क्षेत्र हैं जबकि जम्मू मैदानी इलाके हिन्दू-बहुल हैं.
शर्मा कहते हैं, "हम यह किसी कीमत पर नहीं होने देंगे. एम्स हमारा रैलिंग पॉइंट होगा और उसके बाद एक एक कर सारे मुद्दे उठाए जाएंगे."
'अच्छा काम'

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जम्मू के रिटायर्ड पुलिस अफसर और भाजपा के राष्ट्रीय सचिव फ़ारूक़ ख़ान जम्मू की अनदेखी के आरोपों को बेबुनियाद क़रार देते हैं.
ख़ान का मानना है कि भाजपा और पीडीपी गठबंधन सरकार अच्छा काम कर रही है और लोग उससे खुश हैं.
ख़ान ने बीबीसी से कहा, "कुछ लोग भाजपा के खिलाफ ऐसा अभियान चला रहे हैं क्योंकि वो हमारी कामयाबी को सहन नहीं कर पा रहे हैं. इस अभियान में हमारे विरोधी दल भी शामिल हैं."
दूसरी ओर, अभिनव शर्मा कहते हैं कि भाजपा ने तो चुनाव से पहले सीमा पर शांति बहाल करने की बात कही थी, लेकिन जब से वो सत्ता में आई है अशांति बढ़ गई है.
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