याक़ूब मेमनः गिरफ़्तारी से फांसी की सज़ा तक

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याक़ूब मेमन को मुंबई में 1993 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों की साज़िश का दोषी पाए जाने के बाद मौत की सज़ा सुनाई गई है.
अदालत ने दाऊद इब्राहिम और टाइगर मेमन को इन धमाकों का सूत्रधार माना.
याक़ूब मेमन की सज़ा को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरक़रार रखा. सुप्रीम कोर्ट में उनकी रिव्यू पिटीशन और क्यूरेटिव पिटीशन भी ख़ारिज हो चुकी है.

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भारत के राष्ट्रपति उनकी दया याचिका खारिज कर चुके हैं. फ़िलहाल उन्होंने महाराष्ट्र के राज्यपाल के पास दया याचिका भेजी है. जिस पर फ़ैसला आना बाक़ी है.
12 मार्च, 1993
मुंबई में 12 जगहों पर धमाके हुए. धमाकों में 257 लोग मारे गए और 713 घायल हुए.
बॉम्बे स्टॉक एक्सेंज की 28-मंज़िला इमारत के बेसमेंट में भारतीय समयानुसार दोपहर 1.30 बजे पहला धमाका हुआ जिसमें लगभग 50 लोग मारे गए थे.

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इसके आधे घंटे बाद एक कार धमाका हुआ और अगले दो घंटे से कम समय में कुल 13 धमाके हो चुके थे. इनमें एयर इंडिया बिल्डिंग, सेंटॉर और सी रॉक होटल भी शामिल थे.
4 नवंबर, 1993
मामले में क़रीब 10 हज़ार पन्नों की चार्जशीट (आरोपपत्र) दाखिल की गई. पुलिस ने मामले में 189 लोगों को अभियुक्त बनाया.
19 नवंबर, 1993

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धमाके की जाँच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई.
6 अगस्त, 1994
याक़ूब मेमन को काठमांडू से दिल्ली आने पर कथित तौर पर गिरफ़्तार किया गया.
19 अप्रैल, 1995
मुंबई की टाडा अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई. अगले दो महीनों में अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय किए गए.
सितंबर, 2006

अदालत ने याक़ूब सहित 100 अभियुक्तों को दोषी पाया. बीस को उम्रकैद की सज़ा दी गई.
27 जुलाई, 2007
टाडा जज पीडी कोडे ने याक़ूब को फांसी की सज़ा सुनाई. 11 अन्य दोषियों को भी मौत की सज़ा सुनाई. याक़ूब टाडा के तहत साज़िश रचने, अभियुक्तों को पाकिस्तान जाकर ट्रेनिंग लेने के लिए टिकट का इंतज़ाम करने और विस्फोटक रखने के लिए वाहन लाने के दोषी पाए गए.
20 दोषियों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई गई. 68 लोगों को उम्र कैद से कम की सज़ा हुई.
11 मार्च, 2013

सुप्रीम कोर्ट ने याक़ूब मेमन की मौत की सज़ा बरक़रार रखी. हालांकि 10 अन्य लोगों की मौत की सज़ा उम्रकैद में बदल दी. एक दोषी की जेल में ही मौत हो गई थी.
मई, 2014
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दया याचिका अस्वीकार कर दी.
9 अप्रैल, 2015
सुप्रीम कोर्ट ने याक़ूब मेमन की रिव्यू पेटीशन ख़ारिज की और उनकी मौत की सज़ा बरक़रार रखी.
29, अप्रैल 2015
मुंबई की विशेष अदालत ने याक़ूब की फांसी की तारीख 30 जुलाई तय की.
21 जुलाई, 2015
सुप्रीम कोर्ट ने याक़ूब मेमन की क्यूरेटिव पिटीशन को ख़ारिज कर दिया.
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