मुसलमान योग के ख़िलाफ़ नहीं: नाइक

- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत के आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीपद नाइक का मानना है कि योग का विरोध कुछ लोग ही कर रहे हैं और वह भी सिर्फ़ राजनीतिक वजहों से.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि अल्पसंख्यक और ख़ासकर मुसलमान योग के ख़िलाफ़ नहीं हैं.
ग़लतफ़हमी दूर?

इमेज स्रोत, AP
नाइक कहते हैं कि शुरू में कुछ ग़लतफ़हमी ज़रूर थी, जिस वजह से मुसलमानों का एक तबक़ा योग से अपने आप को जोड़ कर नहीं देख पा रहा था. लेकिन जब सरकार ने उनकी आपत्तियों को मान लिया और उसके मुताबिक़ बदलाव कर दिए तो वह विरोध भी दूर हो गया.
नाइक के मुताबिक़, सरकार ने यह साफ़ कर दिया कि सूर्य नमस्कार तो महज़ योग का एक नाम है, इसका सूर्य से कई संबंध नही है. इसके बाद इस आसन को सरकारी कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया तो मुसलमानों का विरोध ख़त्म हो गया.
'योग थोपा नहीं जाएगा'

इमेज स्रोत, Narendra Modi
वे इस आरोप को सिरे से ख़ारिज करते हैं कि भाजपा सरकार किसी पर योग थोप रही है. नाइक कहते हैं, “योग में शामिल होने के लिए किसी पर किसी तरह का कोई दवाब नहीं है. जो शामिल होना चाहते हों, वे हो सकते हैं, जो नहीं होना चाहते, उनके साथ कोई ज़बरदस्ती नहीं है.”
श्रीपद नाइक के मुताबिक़, देवबंद स्थित दारुल उलूम ने भी सरकार के योग कार्यक्रम का समर्थन किया है.
'धर्म से जोड़ना ग़लत'

इमेज स्रोत, AFP
वे योग को धर्म से जोड़ने के ख़िलाफ़ है. उनके मुताबिक़, “योग एक जीवन पद्धति है, एक क्रिया है, जिससे रोगों से बचा जा सकता है और स्वस्थ रहा जा सकता है. इसका किसी धर्म से कोई ताल्लुक नहीं है. इसे एक धर्म से जोड़ना पूरी तरह ग़लत है.”
'47 मुस्लिम देशों में योग दिवस'

इमेज स्रोत, AP
नाइक तर्क देते हैं कि संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव आम सहमति से पारित हुआ. किसी देश ने इसका विरोध नहीं किया जबकि दूसरे धर्मों की बहुतायत वाले देशों ने भी इसका समर्थन किया. जिन 177 देशों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है, उनमें से 47 तो मुस्लिम देश हैं.
'योग के लिए कोई दबाव नहीं'

इमेज स्रोत, AP
ऐसा ही उनका मानना सरकारी कर्मचारियों के लिए भी है. नाइक का दावा है कि किसी सरकारी कर्मचारी पर यह दबाव नहीं था कि वे योगासन करें. लेकिन बड़ी तादाद में कर्मचारियों ने इसमें भाग लिया और वह भी स्वेच्छा और उत्साह से.
आयुष मंत्री यह मानते हैं कि कुछ लोगों का विरोध राजनीतिक कारणों से बरक़रार है. इसके आगे वे यह भी जोड़ते हैं कि अच्छे काम का थोड़ा बहुत विरोध तो होता ही है.

इमेज स्रोत, EPA
श्रीपद नाइक योगासन के इतने बड़े कार्यक्रम आयोजित करने पर हुए सरकारी खर्च को भी पूरी तरह वाज़िब मानते हैं.
उनका तर्क है, “योगासन करने से लोगों में रोगों को रोकने की ताक़त बढ़ेगी, लोग कम बीमार पड़ेंगे. इससे इलाज पर होने वाले ख़र्च में कमी आएगी. इस तरह योगासन करने वालों का स्वास्थ्य पर निजी ख़र्च भी कम होगा और सरकारी पैसे भी बचेंगे. इसलिए योग के प्रचार प्रसार और इस आयोजन पर हुआ खर्च ग़लत नहीं है.”
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>














