अब चेले चुनेंगें कि उनका गुरु कौन हो ?

भारतीय फ़िल्म एवं टेलिविजन संस्थान (एफ़टीआईआई) के चेयरमैन बनाए जाने के विरोध पर गजेंद्र चौहान ने सवाल किया है कि क्या अब छात्र ख़ुद तय करेंगे कि उनका गुरु कौन होगा?
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने गजेंद्र चौहान को एफ़टीआईआई का चेयरमैन नियुक्त किया है.
गजेंद्र चौहान ने बीबीसी संवाददाता वैभव दीवान से ख़ास बातचीत में कहा, "मुझे एक ज़िम्मेदारी दी गई है और उसके शुरू होने से पहले ही उसका विरोध हो रहा है. ऐसे सवाल उठाए जा रहे हैं जिसकी कोई अहमियत नहीं हैं. एक आदमी की काबिलियत और परफॉर्मेंस जाने बगैर उस पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया गया."
उनका यह भी कहना है कि मेरी रील लाइफ़ के ऊपर मेरी रियल लाइफ़ को ना समझा जाए.
पार्टी की विचारधारा को संस्था में लागू करने की बात पर गजेंद्र चौहान का कहना है, " जो बात अभी हुई ही नहीं उसे आपने पहले ही कैसे मान लिया. मैं बीजेपी का सदस्य हूं, इसमें मुझे कोई शर्म नहीं. हर किसी की कोई ना कोई विचारधारा होती है लेकिन ये विचारधारा क्रिएविटी से दूर होती है. कला का जीवन अलग होता है और विचारधारा अलग."

इमेज स्रोत, DEVIDAS DESHPANDE
इस सारे विवाद पर एफ़टीआईआई के अंतिम वर्ष के छात्र रंजीत नायर ने बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन से कहा, "जिस तरह के दिग्गज एफ़टीआईआई के चेयरमैन रह चुके हैं उसमें गजेंद्र चौहान बिल्कुल फ़िट नहीं बैठते हैं.
उनका कहना है, "उनके अब तक के काम से यह पता चलता है कि वे इस पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार नहीं हैं. चेयरमैन का पद ऐसा होता है जिसके लिए विज़न की जरूरत होती है."
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यह नियुक्ति किसी प्रक्रिया से हुई है तो उसको लेकर छात्रों के साथ कोई संवाद क्यों नहीं है.
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