मैंने मोदी को क्या फ़ायदा पहुंचायाः सुषमा

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भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने निर्वासन में रह रहे पूर्व आईपीएल कमिशनर ललित मोदी को मदद करने के आरोपों पर सफ़ाई दी है.
सुषमा स्वराज ने कहा है कि उन्होंने मानवीय आधार पर ललित मोदी को ब्रिटेन की ओर से ट्रैवल डॉक्यूमेंट दिए जाने के बारे में ब्रितानी उच्चायुक्त से कहा था.
आईपीएल के पहले कमिशनर ललित मोदी पर वित्तीय अनियमतताओं के आरोप हैं और फ़िलहाल वह ब्रिटेन में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं. वह इन आरोपों को ख़ारिज करते आए हैं.
भारतीय टीवी चैनल 'टाइम्स नाउ' ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि सुषमा स्वराज ने मोदी को ट्रैवल डॉक्यूमेंट दिलाने में मदद की थी.
सुषमा स्वराज के ट्वीट्स के बाद जैसे कोई राजनीतिक भूचाल आ गया है और कई राजनीतिक दल सुषमा स्वराज के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.
'क्या फ़ायदा पहुंचाया?'

स्वराज ने रविवार को ट्वीट किया कि 'जुलाई 2014 में मोदी ने उनसे बात की थी और कहा था कि उनकी पत्नी कैंसर की मरीज़ हैं और चार अगस्त को उनका पुर्तगाल में ऑपरेशन होना था.'
उनके अनुसार, "मानवीय आधार पर मैंने ब्रितानी उच्चायुक्त से ये कहा कि ब्रितानी सरकार को अपने नियमों और क़ानूनों के तहत मोदी के अनुरोध पर विचार करना चाहिए. यदि ब्रितानी सरकार उन्हें ट्रेवल डॉक्यूमेंट देती है तो इससे दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्ते खराब नहीं होंगे."
इस मामले पर विपक्ष के लगातार हमलावर होने और उनका इस्तीफ़ा मांगने के बाद रविवार शाम सुषमा स्वराज ने फिर ट्वीट कर पूछा कि उन्होंने ललित मोदी को क्या फ़ायदा पहुंचाया है.
उन्होंने ट्वीट किया, "ललित मोदी को मैंने क्या फ़ायदा पहुंचाया- यही कि वह कैंसर से पीड़ित अपनी बीवी की सर्जरी के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर सकें."

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उन्होंने आगे ट्वीट किया, "वह लंदन में थे, अपनी बीवी की सर्जरी के बाद, वह फिर लंदन लौट आए. इसमें मैंने क्या बदल दिया?"
विदेश मंत्री के एक और ट्वीट के मुताबिक 'लेबर पार्टी के नेता कीथ वाज़ ने उनसे बात की और उन्होंने कीथ वाज़ को भी यही कहा था.'
सुषमा स्वराज ने ये भी ट्वीट किया था कि 'वह व्यक्तिगत तौर पर मानती हैं कि ऐसी आपात स्थिति में यदि किसी भारतीय नागरिक को ट्रैवल डॉक्यूमेंट दिए जाएं तो दोनों देशों के रिश्ते ख़राब नहीं होने चाहिए.'
विदेश मंत्री ने एक ट्वीट में ये भी कहा कि कुछ ही दिनों बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने यूपीए सरकार के ललित मोदी के पासपोर्ट ज़ब्त करने के आदेश को रद्द कर दिया था क्योंकि ये उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन था और उन्हें उनका पासपोर्ट लौटा दिया गया.
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