पुलिस के छर्रों से लड़के की आंख हुई बेकार

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- Author, हाज़िक क़ादरी
- पदनाम, श्रीनगर से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
भारत प्रशासित कश्मीर में विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस कार्यवाही में 'पैलेट गन' के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग तेज़ हो गई है.
हाल ही में राज्य के पल्हाल्लन इलाके में पुलिस कार्यवाही के दौरान इसके छर्रे लगने से पंद्रह वर्षीय हामिद नज़ीर अपनी दाहिनी आंख खो बैठा.
हवाल हत्याकांड के 25 साल पूरे होेने पर पांच दिन पहले निकाली गई रैली में हुई पुलिस कार्रवाही में बंदूक से निकले करीब 200 छर्रे उसके चेहरे पर लगे थे.
मई 1990 में हवाल में हुए एक विरोध प्रदर्शन पर अर्धसैनिक बलों ने गोलियां चलाई थीं और 60 लोग मारे गए थे.
दाहिनी आंख गई
बेमिना के स्किम्स अस्पताल में हामिद का इलाज कर रहे डॉक्टर ने बताया कि आंख के अंदरूनी हिस्सों में छेद हो जाने से हामिद अब दाहिनी आंख से देख नहीं पाएगा.
घटना के बाद सामाजिक औऱ राजनीतिक संगठनों ने पुलिस के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है.

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उधर पुलिस के आईजी जावेद अहमद गिलानी ने पुलिस का बचाव करते हुए कहा कि हामिद एक पुलिसकर्मी को वाहन से बाहर घसीट रहा था इसलिए पुलिस को छर्रे छोड़ने पड़े.
जबकि हामिद के पिता इस बात से इनकार करते हैं, उनका कहना है कि हामिद रैली में शामिल हुआ ही नहीं था.
पहला नहीं है यह मामला

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2010 के बाद भारत प्रशासित कश्मीर में पुलिस कार्रवाई में छर्रों के इस्तेमाल से लोगों के गंभीर रूप से घायल होने के कई मामले सामने आये हैं.
पिछले साल बारामुल्ला में अफ़ज़ल गुरु की फांसी के विरोध में हुई एक रैली के दौरान छर्रे लगने से दो लोगों ने अपनी आंखें गंवा दीं.
छर्रों के इस्तेमाल को रोकने के लिए मानवाधिकार संगठनों ने राज्य सरकार से कई बार मांग की है.
पीडीपी के युवा संगठन के अध्यक्ष वहीद रहमान पारा ने कहा,''गैर-जानलेवा हथियारों के इस्तेमाल पर सरकार गंभीर है.''
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