ये भेदभाव है या मुसलमानों की कमियां?

भारत मुसलमान ग़रीबी

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    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली

मैं मुसलमान हूं लेकिन ज़ीशान ख़ान की तरह मेरे ख़िलाफ़ नौकरी में कभी भेदभाव नहीं हुआ. मेरा अनुभव बताता है कि आत्मविश्वास हो तो थोड़ा बहुत भेदभाव झेल सकते हैं.

मैं उदारवादी लोगों से कहना चाहता हूं कि अगर मुसलमानों के ख़िलाफ़ नौकरियों में भेदभाव है तो इसके ज़िम्मेदार उतने ही आप हैं जितना कांग्रेस पार्टी, जिसने 60 साल तक शासन किया लेकिन इस भेदभाव को मिटा ना सकी.

उदारवादी लोग जितनी आज आवाज़ उठा रहे हो अगर कल कांग्रेस के ज़माने में उठाते तो आज ज़ीशान के साथ जो हुआ वो शायद न होता.

मोदी सरकार वही कर रही है जो कांग्रेस सालों से करती चली आ रही थी.

'बहुत भेदभाव है'

भारत मुसलमान, मोदी

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मुसलमान होने के नाते मुझे इस बात का अंदाज़ा है कि कुछ सरकारी और कुछ ग़ैर सरकारी संस्थाओं में मुस्लिम विरोधी भावनाएं मौजूद हैं.

हमें इस बात का भी अंदाज़ा है कि आबादी के हिसाब से सरकारी विभागों में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व बहुत चिंताजनक है. ग़ैर सरकारी कंपनियों में और भी बुरा हाल है.

मुझे इस बात का भी एहसास है कि शायद मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद मुस्लिम विरोधी भेदभाव को हवा मिली हो.

मैं अपने निजी अनुभव से यह दावा करता हूँ कि यह भेदभाव बहुत सतही है और सालों से चला आ रहा है.

भारतीय मुसलमान

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सालों पहले जब मैं लंदन में बीबीसी के मुख्यालय में काम करता था तो मेरा छोटा भाई मुझे बार-बार फ़ोन करके कहता था कि 'भाई मुझे लंदन बुला लो. अपने देश में मुसलमानों के ख़िलाफ़ बहुत भेदभाव है.' वह मुंबई में एक सरकारी बैंक में काम करता था.

'नादानी थी'

मैं उससे कहता था 'अपनी निराशा और कमियों को भेदभाव का नाम मत दो. डटे रहो, मेहनत करो. एक दिन तुम्हें समझ में आएगा कि तुम्हारे अंदर कमियों की ज़िम्मेदार सरकार या हिन्दू समाज उतना नहीं है, जितने तुम ख़ुद हो.'

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इमेज कैप्शन, ज़ीशान अली ख़ान को मुसलमान होने के नाते नौकरी देने से इनकार कर दिया गया था.

सालों बाद उसे अपनी क्षमता से कहीं अधिक कामयाबी मिली. आज वह अपनी नादानी पर केवल हंस कर रह जाता है.

मेरे बड़े से परिवार के अधिकतर नौजवान सरकारी और ग़ैर सरकारी नौकरियों में हैं. किसी ने भेदभाव की शिकायत नहीं की है.

मुझे डर इस बात का है कि कहीं मुस्लिम युवा पीढ़ी अपनी ख़ामियों को छुपाने के लिए भेदभाव का राग अलापना न शुरू कर दे.

ज़ीशान के साथ बुरा हुआ. उसके धर्म के कारण उसे नौकरी न देने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर देना चाहिए लेकिन ज़ीशान को मेरी सलाह होगी कि वह मीडिया में हो रहे शोर पर ध्यान न दें.

उन्हें नौकरी ज़रूर मिलेगी और जल्द मिलेगी.

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