'समलैंगिक शादी' के विज्ञापन के पीछे की कहानी

harish iyer with his mother

समलैंगिक अधिकारों की पैरवी करने वाले हरीश अय्यर की मां ने कुछल दिन पहले वैवाहिक विज्ञापन छपवाया था.

माना जा रहा है कि भारत में किसी समलैंगिक के विवाह का ये पहला विज्ञापन है. इस विज्ञापन को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएँ आईं.

जानिए हरीश अय्यर के अनुभव उन्हीं की ज़बानी

harish iyer

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बहुत व्यस्त होने की वजह से मैंने अपनी निजी ज़िंदगी पर ध्यान नहीं दिया.

मैं पिछले पांच साल से सिंगल हूं, पता नहीं मुझे क्यों नहीं मिला कोई. मेरी मां को भी चिंता थी.

उन्हें भी लग रहा था कि थोड़े साल में वो नहीं रहेंगी तो मैं अकेला रह जाऊंगा.

इस विज्ञापन का अच्छा रिस्पॉन्स रहा है. कुछ अच्छे रिश्ते आए हैं. पांच रिश्ते आए हैं. कुछ गाली वाले ई मेल भी मेरी मम्मी को आए हैं. हालांकि हमें उम्मीद थी कि लोग अलग-अलग तरह से रिएक्ट करेंगे.

एक चीज़ की निराशा भी है कि मम्मी ने मज़ाकिया तौर पर लिखा था कि अय्यर को प्राथमिकता होगी, लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं कि देखो ये गे लड़का मुसलमान नहीं चाहता, दलित नहीं चाहता.

'समलैंगिक होना ग़ैरक़ानूनी नहीं'

lgbt flag

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ये बहुत शर्मिंदगी वाली बात है. रविवार को अख़बार खोल कर देखें तो ब्राह्मण, क्षत्रिय और धर्म के आधार पर विज्ञापन होते हैं. हम उसके ख़िलाफ़ आवाज़

नहीं उठाते. लेकिन एक गे लड़का कर रहा है उसे जोक की तरह नहीं देखकर उसे अलग मुद्दा बना दिया गया है.

उनमें हिम्मत होनी चाहिए कि हर साल अख़बार के सामने जाकर खड़े हो जाएं हर विज्ञापन के ख़िलाफ़.

शर्म की बात ये है कि जिन अख़बारों ने मुझे विज्ञापन से मना किया उन्होंने एलजीबीटी समुदाय पर बहुत शानदार रिपोर्टिंग की है. क्या उनकी विज्ञापन टीम को इतना भी पता नहीं था कि समलैंगिक होना ग़ैरक़ानूनी नहीं है.

मैं तभी जेल जा सकता हूं अगर मैं अप्राकृतिक सेक्स करूं. और ये काम सिर्फ़ समलैंगिक नहीं हेटरोसेक्शुअल लोग भी कर सकते हैं. आदमी अगर औरत के साथ अप्राकृतिक सेक्स करे, जिससे बच्चा न हो, तो वो भी जेल जा सकता है.

'शाकाहारी पार्टनर चाहिए'

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इमेज कैप्शन, एलजीबीटी समुदाय धारा 377 को हटाने की मांग करता रहा है.

क्या हमें सौ फ़ीसदी यकीन होता है कि जो भी शादी करता है वो सेक्स तभी करता है जब उसे बच्चा पैदा करना होता है. वो मुझसे कहते थे कि मैटर में लीगल इश्यू है. मैंने उन्हें समझाया भी कि ये पूरी तरह वैध है.

शादी को कानूनी मंज़ूरी नहीं होगी लेकिन वो ग़ैरक़ानूनी नहीं है. आख़िर में मिड डे अख़बार ने इसे छापा.

मैं चाहता हूं कि मेरा पार्टनर प्यार करने वाला और दोस्ताना व्यवहार वाला हो. वो शाकाहारी हो, चाहे किसी भी धर्म या जाति का हो.

(हरीश अय्यर से बीबीसी संवाददाता विनीत खरे की बातचीत पर आधारित)

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