आरटीआई के अंबार पर बैठी है सरकार

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- Author, अफ़रोज़ आलम साहिल
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
देश में सूचना के अधिकार (आरटीआई) क़ानून के तहत मांगी गई सूचनाओं का भारी बैकलॉग है.
सूचना के अधिकार से जुड़े देश के सर्वोच्च संस्थान यानी केन्द्रीय सूचना आयोग के पास 15 मई तक 39,203 अपील और शिकायतें लंबित हैं.
और जिस रफ़्तार से आयोग में केसों का निपटारा हो रहा है, उससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इनके निपटारे में दो साल से अधिक समय लग सकता है.
लंबा इंतज़ार

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अगर मामला राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह या रक्षा मंत्रालय जैसे अहम कार्यालयों से संबंधित है तो यह इंतज़ार चार से पांच साल तक हो सकता है.
स्पष्ट रहे कि 22 अगस्त, 2014 से मुख्य सूचना आयुक्त का पद खाली है.
तो वहीं तीन सूचना आयुक्त के पद भी खाली हैं. यानी आयोग के सारे कामों की ज़िम्मेदारी सात सूचना आयुक्तों के कंधों पर टिकी हुई है.
भविष्य में जब आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त की बहाली होगी, तो उन्हें तोहफ़े में 14,914 मामले (शिकायत व अपील दोनों) निपटारे के लिए मिलेंगे.
हालांकि बहाली तक इसमें और इज़ाफ़ा हो जाएगा.
बढ़ता बोझ

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आंकड़े बताते हैं कि साल 2014 में आयोग के पास सुनवाई के लिए 53,021 मामले आए.
इसमें सिर्फ 17151 मामलों का निपटारा आयोग के सात आयुक्तों ने मिलकर किया.
सूचना आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी यह भी बताती है कि आयोग में केन्द्रीय सूचना आयुक्त पद भले ही 22 अगस्त, 2014 से खाली हो, लेकिन उन्होंने काम 2013 से ही बंद कर रखा था.
क़ानून होगा कमज़ोर?

सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय बताती हैं, “हमने ख़ुद सूचना आयुक्त की बहाली के संबंध में आरटीआई दी थी, उससे यह पता चला कि ये सरकार मीटिंग तो कर रही है, पर इन मीटिंग्स के मिनट्स ही नहीं रखे जा रहे हैं. सरकार यह जानती है कि इस क़ानून को सीधे तो ख़त्म करना काफी मुश्किल है, ऐसे में यही रास्ता सबसे बेहतर है.”
इसके पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी केन्द्रीय सूचना आयुक्त के रिक्त पद को लेकर केन्द्र सरकार की आलोचना कर चुकी हैं.
उन्होंने कहा था, “सरकार बेरहमी से आरटीआई अधिनियम को कमज़ोर करने तथा ख़ुद को बचाने की कोशिश कर रही है.”
क्या है प्रक्रिया

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आरटीआई के तहत जन सूचना अधिकारी को आवेदन करने के बाद 30 दिनों का इंतज़ार करना पड़ता है.
अगर फिर भी सूचना हासिल न हो या आप हासिल सूचना से संतुष्ट नहीं हैं, तो अगले 30 दिनों के भीतर उसी दफ़्तर में बहाल प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास प्रथम अपील कर सकते हैं.
अगर यहां संतुष्ट नहीं हैं तो अगले 90 दिनों के भीतर कभी भी राज्य या केन्द्रीय सूचना आयोग में द्वितीय अपील या शिकायत कर सकते हैं.
नियम के अनुसार इन शिकायतों और अपीलों का निपटारा सूचना आयुक्त को 45 दिनों के भीतर कर देना होता है.
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