अभिजीत और उनके विवादित बयान

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- Author, सुशांत एस मोहन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई
सलमान ख़ान की सज़ा पर गायक अभिजीत की 'कुत्ता रोड पर सोेयगा कुत्ते की मौत मरेगा' वाली टिप्पणी की बहुत आलोचना हुई है.
लेकिन ये पहली बार नहीं जब अभिजीत विवादों में घिरे हैं.
<link type="page"><caption> पढ़िए सलमान खान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2015/05/150507_salmaan_khan_other_cases_sk" platform="highweb"/></link> मामले से पहले उन्होंने कब कब दिए वैसे बयान.
पाकिस्तानी गायकों पर पाबंदी
<link type="page"><caption> अभिजीत</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2015/05/150507_salman_khan_zubair_blog_sr" platform="highweb"/></link> ने साल 2003 में भारत आ रहे पाकिस्तानी गायकों पर बैन की मांग की थी.
उन्होंने गायक अनूप जलोटा, जगजीत सिंह, कुमार शानू और जसविंदर नरूला के साथ मिलकर भारत सरकार को एक चिट्ठी भी लिखी थी.

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चिट्ठी में उन्होंने लिखा था, “हम क्यों इन लोगों को अपने यहां गाने का मौक़ा दे रहे हैं, जबकि इनके यहां हमारा स्वागत नहीं किया जाता? पाकिस्तानी गायकों को भारत में बैन किया जाना चाहिए.”
अभिजीत ने रीडिफ़ को दिए साक्षात्कार में कहा था, “हम उनके साथ क्रिकेट नहीं खेलते क्योंकि वो हमारे लोगों को मार रहे हैं. फिर हम उन्हें गाना क्यों गाने दे रहे हैं?”
'पाकिस्तान के आर्टिस्ट ज़ीरो'
साल 2009 में अभिजीत को एक रिएलिटी सिंगिंग शो का जज बनने का मौक़ा मिला.

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रिएलिटी शो 'एक से बढ़कर एक' के एक एपिसोड में जब एक प्रतिभागी ने पाकिस्तानी <link type="page"><caption> गायक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2013/10/131024_manna_dey_popularity_pkp" platform="highweb"/></link> आतिफ़ असलम का गाना गाया तो अभिजीत भड़क गए.
अभिजीत का कहना था, “ये क्या गाना है? ये बेसुरी गायकी है जिसे स्टूडियो में सॉफ़्टवेयर की मदद से ठीक किया जाता है. मुझे दुख है कि हमारे यहां ऐसे गानों को गाया जा रहा है.”
शो के बाद अपने बयान पर कायम रहते हुए अभिजीत ने कहा था, “वे सुरों के मामले में ज़ीरो हैं लेकिन हमारे यहां लोग पैसा कमाने के लिए उनके गायकों को प्रमोट कर रहे हैं."
हिमेश रेशमिया की खिंचाई
पाकिस्तानी गायकों को प्रोमोट करने के लिए अभिजीत ने हिमेश रेशमिया की भी खिंचाई की थी.
उन्होंने कहा था, ”पैसों के लिए पाकिस्तानी गायकों के घर में रोटी की फिक्र की जा रही है लेकिन अपने गायक भूखे मर रहे हैं, उन्हें कौन प्रमोट करेगा?”
शाहरूख और फ़राह से खफ़ा

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ख़ुद को शाहरूख़ ख़ान की ऑरिजनल आवाज़ मानने वाले अभिजीत कभी शाहरूख़ और <link type="page"><caption> फराह खान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2012/10/121018_farah_khan_pkp" platform="highweb"/></link> के काफ़ी करीबी थे.
लेकिन कहा जाता है कि उन्हें लगा कि उन्हें सही क्रेडिट नहीं मिल रहा तो वो दोनों से दूर होते चले गए.
अभिजीत की नाराज़गी की वजह ये थी कि साल 2007 में 'ओम शांति ओम' में फ़िल्म के अंत में ड्रेसवाले और चायवाले को तो दिखाया गया लेकिन गायकों की शक्ल नहीं दिखाई गई.
अभिजीत ने कहा था, “मैं हूं ना में मेरा नाम सबसे अंत में आया. मैंने सह लिया लेकिन 'ओम शांति ओम' में मुझे अंत में भी नहीं दिखाया गया. इसका मुझे दुख है.”
अभिजीत ने अपनी नाराज़गी <link type="page"><caption> शाहरूख़</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2013/04/130401_manojkumar_srk_pkp" platform="highweb"/></link> और फ़राह को भी बताई थी और ये आख़िरी बार था जब वो शाहरूख़ की आवाज़ बने.
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